सियाराम
जय श्री राम
श्रीरामचरितमानस · खुल रहा है…
सियाराम
जय श्री राम
श्रीरामचरितमानस · खुल रहा है…
रामचरितमानस · पद-दर-पद
सातों काण्डों के 6,157 पद, एक-एक करके। हर पद के साथ पहले PDF भावार्थ, फिर मूल पाठ, शब्द-दर-शब्द अर्थ और स्रोत-प्रसंग।
भावार्थ: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण के PDF से; शब्द-दर-शब्द अर्थ AI प्रारूप हैं और विद्वान-समीक्षा बाकी है। स्रोत और प्रक्रिया।
जथा सुअंजन अंजि दृग साधकजैसे सिद्धाञ्जनको नेत्रोंमें लगाकर साधक, सिद्ध और सुजान पर्वतों, वनों और पृथ्वीके अंदर कौतुकसे ही बहुत-सी खाने…बालकाण्ड · दोहा 2सुनि समुझहिं जन मुदित मनजो मनुष्य इस संत-समाजरूपी तीर्थराजका प्रभाव प्रसन्न मनसे सुनते और समझते हैं और फिर अत्यन्त प्रेमपूर्वक इसमें ग…बालकाण्ड · दोहा 3 (क)बंदउँ संत समान चित हितमैं संतोंको प्रणाम करता हूँ, जिनके चित्तमें समता है, जिनका न कोई मित्र है और न शत्रु! जैसे अञ्जलिमें रखे हुए स…बालकाण्ड · दोहा 3 (ख)संत सरल चित जगत हितसंत सरलहृदय और जगत्के हितकारी होते हैं, उनके ऐसे स्वभाव और स्नेहको जानकर मैं विनय करता हूँ, मेरी इस बाल-विनयको…