बालकाण्ड · दोहा 1 · दोहा/सोरठा
जथा सुअंजन अंजि दृग साधक सिद्ध सुजान।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दजैसे सिद्धाञ्जनको नेत्रोंमें लगाकर साधक, सिद्ध और सुजान पर्वतों, वनों और पृथ्वीके अंदर कौतुकसे ही बहुत-सी खानें देखते हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 20 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जथा सुअंजन अंजि दृग साधक सिद्ध सुजान।
कौतुक देखत सैल बन भूतल भूरि निधान।।1।।
स्रोत अभिलेख 1.1 · पुस्तक पृ. 19, 20
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1जथा सुअंजन अंजि दृग साधक सिद्ध सुजान।
English explanation
Just as a knowledgeable, accomplished practitioner applies excellent salve to the eyes.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जथा | जैसे | just as |
| सुअंजन | उत्तम अंजन | excellent eye-salve |
| अंजि | लगाकर | having applied |
| दृग | आँखों में | to the eyes |
| साधक | साधक | a practitioner |
| सिद्ध | सिद्ध | an accomplished adept |
| सुजान | जानकार | a knowledgeable one |
2कौतुक देखत सैल बन भूतल भूरि निधान।।1।।
English explanation
With wonder, that practitioner sees many treasures in the mountains, forests, and earth.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कौतुक | आश्चर्यपूर्वक | with wonder |
| देखत | देखता है | sees |
| सैल | पर्वतों में | in mountains |
| बन | वनों में | in forests |
| भूतल | धरती में | in the earth |
| भूरि | बहुत से | many |
| निधान | खजाने | treasures |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 1
- स्रोत अभिलेख
- 1.1
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 20
- सहायक विषय
- गुरु-वन्दना
- मुद्रित पृष्ठ
- 19, 20
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।