बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
गुरु पद रज मृदु मंजुल अंजन। नयन अमिअ दृग दोष बिभंजन।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दश्रीगुरु महाराजके चरणोंकी रज कोमल और सुन्दर नयनामृत-अञ्जन है, जो नेत्रोंके दोषोंका नाश करनेवाला है। उस अञ्जनसे विवेकरूपी नेत्रोंको निर्मल करके मैं संसाररूपी बन्धनसे छुड़ानेवाले श्रीरामचरित्रका वर्णन करता हूँ॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 20 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
गुरु पद रज मृदु मंजुल अंजन। नयन अमिअ दृग दोष बिभंजन।।
तेहिं करि बिमल बिबेक बिलोचन। बरनउँ राम चरित भव मोचन।।
स्रोत अभिलेख 1.2 · पुस्तक पृ. 20, 21
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 गुरु पद रज मृदु मंजुल अंजन। नयन अमिअ दृग दोष बिभंजन।।
English explanation
AI-generated explanatory draft: The dust of the guru’s feet is a gentle, beautiful eye-salve, nectar for the eyes that removes defects of vision.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गुरु | आध्यात्मिक गुरु | spiritual teacher |
| पद | चरणों की | of the feet |
| रज | धूल | dust |
| मृदु | कोमल | gentle |
| मंजुल | सुंदर | beautiful |
| अंजन | नेत्रों में लगाने का अंजन | eye-salve |
| नयन | नेत्रों के लिए | for the eyes |
| अमिअ | अमृत | nectar |
| दृग | दृष्टि के | of vision |
| दोष | दोष | defects |
| बिभंजन | नष्ट करने वाला | destroying |
2 तेहिं करि बिमल बिबेक बिलोचन। बरनउँ राम चरित भव मोचन।।
English explanation
Having purified the eyes of discernment with it, I recount Rama’s deeds, which release one from worldly bondage.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तेहिं | उस गुरु-चरण-धूल से | with that dust of the guru’s feet |
| करि | करके | having made |
| बिमल | निर्मल | clear and pure |
| बिबेक | विवेक के | of discernment |
| बिलोचन | नेत्र | eyes |
| बरनउँ | मैं वर्णन करता हूँ | I recount |
| राम | भगवान राम के | of Lord Rama |
| चरित | चरित्र और कर्म | life and deeds |
| भव | संसार-बंधन से | from worldly bondage |
| मोचन | मुक्त करने वाला | liberating |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.2
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 20
- सहायक विषय
- ब्राह्मण-संत-वन्दना
- मुद्रित पृष्ठ
- 20, 21
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।