बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बंदउँ प्रथम महीसुर चरना। मोह जनित संसय सब हरना।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दपहले पृथ्वीके देवता ब्राह्मणोंके चरणोंकी वन्दना करता हूँ, जो अज्ञानसे उत्पन्न सब संदेहोंको हरनेवाले हैं। फिर सब गुणोंकी खान संत-समाजको प्रेमसहित सुन्दर वाणीसे प्रणाम करता हूँ॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 20 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
बंदउँ प्रथम महीसुर चरना। मोह जनित संसय सब हरना।।
सुजन समाज सकल गुन खानी। करउँ प्रनाम सप्रेम सुबानी।।
स्रोत अभिलेख 1.2 · पुस्तक पृ. 20, 21
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 बंदउँ प्रथम महीसुर चरना। मोह जनित संसय सब हरना।।
English explanation
First I bow to the feet of the Brahmins, which remove all doubts born of delusion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बंदउँ | मैं वंदना करता हूँ | I bow to |
| प्रथम | पहले | first |
| महीसुर | ब्राह्मणों के | of the Brahmins |
| चरना | चरण | feet |
| मोह | मोह से | from delusion |
| जनित | उत्पन्न | born |
| संसय | संशय | doubts |
| सब | सभी | all |
| हरना | दूर करने वाले | removing |
2 सुजन समाज सकल गुन खानी। करउँ प्रनाम सप्रेम सुबानी।।
English explanation
With love and gracious words, I bow to the company of good people, a treasury of every virtue.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुजन | सज्जनों का | of good people |
| समाज | समूह | company |
| सकल | समस्त | all |
| गुन | गुणों की | of virtues |
| खानी | खान | treasury |
| करउँ | मैं करता हूँ | I offer |
| प्रनाम | प्रणाम | obeisance |
| सप्रेम | प्रेम सहित | with love |
| सुबानी | सुंदर वाणी से | with gracious words |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.2
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 20
- सहायक विषय
- ब्राह्मण-संत-वन्दना
- मुद्रित पृष्ठ
- 20, 21
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।