बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
साधु चरित सुभ चरित कपासू। निरस बिसद गुनमय फल जासू।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दसंतोंका चरित्र कपासके चरित्र (जीवन)-के समान शुभ है, जिसका फल नीरस, विशद और गुणमय होता है। (कपासकी डोडी नीरस होती है, संत-चरित्रमें भी विषयासक्ति नहीं है, इससे वह भी नीरस है; कपास उज्ज्वल होता है, संतका हृदय भी अज्ञान और पापरूपी अन्धकारसे रहित होता है, इसलिये वह विशद है, और कपासमें गुण (तन्तु) होते हैं, इसी प्रकार संतका चरित्र भी सद्गुणोंका भण्डार होता है, इसलिये वह गुणमय है।) [जैसे कपासका धागा सूईके किये हुए छेदको अपना तन देकर ढक देता है, अथवा कपास जैसे लोढ़े जाने, काते जाने और बुने जानेका कष्ट सहकर भी वस्त्रके रूपमें परिणत होकर दूसरोंके गोपनीय स्थानोंको ढकता है उसी प्रकार] संत स्वयं दु:ख सहकर दूसरोंके छिद्रों (दोषों)-को ढकता है, जिसके कारण उसने जगत्में वन्दनीय यश प्राप्त किया है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 20 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
साधु चरित सुभ चरित कपासू। निरस बिसद गुनमय फल जासू।।
जो सहि दुख परछिद्र दुरावा। बंदनीय जेहिं जग जस पावा।।
स्रोत अभिलेख 1.2 · पुस्तक पृ. 20, 21
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 साधु चरित सुभ चरित कपासू। निरस बिसद गुनमय फल जासू।।
English explanation
A saint’s virtuous conduct resembles that of cotton, whose fruit is without juice, pure white, and full of fibers.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| साधु | साधु का | of a saint |
| चरित | चरित्र | conduct |
| सुभ | शुभ | virtuous |
| चरित | स्वभाव या चरित्र | nature or conduct |
| कपासू | कपास का | of cotton |
| निरस | रसहीन | without juice |
| बिसद | उज्ज्वल और निर्मल | white and pure |
| गुनमय | रेशों से भरा; गुणों से पूर्ण | full of fibers; full of virtues |
| फल | फल | fruit |
| जासू | जिसका | whose |
2 जो सहि दुख परछिद्र दुरावा। बंदनीय जेहिं जग जस पावा।।
English explanation
One who bears suffering and conceals others’ flaws is worthy of reverence; through this, such a one gains renown in the world.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जो | जो | who |
| सहि | सहकर | having endured |
| दुख | दुख | suffering |
| परछिद्र | दूसरों के छिद्र या दोष | others’ holes or flaws |
| दुरावा | ढकता है | conceals |
| बंदनीय | वंदना योग्य | worthy of reverence |
| जेहिं | जिससे; इस गुण के कारण | through which; because of this quality |
| जग | संसार में | in the world |
| जस | यश | renown |
| पावा | प्राप्त किया | gained |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.2
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 20
- सहायक विषय
- ब्राह्मण-संत-वन्दना
- मुद्रित पृष्ठ
- 20, 21
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।