बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मुद मंगलमय संत समाजू। जो जग जंगम तीरथराजू।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दसंतोंका समाज आनन्द और कल्याणमय है, जो जगत्में चलता-फिरता तीर्थराज (प्रयाग)है। जहाँ (उस संतसमाजरूपी प्रयागराजमें) रामभक्तिरूपी गङ्गाजीकी धारा है और ब्रह्मविचारका प्रचार सरस्वतीजी हैं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 21 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
मुद मंगलमय संत समाजू। जो जग जंगम तीरथराजू।।
राम भक्ति जहँ सुरसरि धारा। सरसइ ब्रह्म बिचार प्रचारा।।
स्रोत अभिलेख 1.2 · पुस्तक पृ. 20, 21
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 मुद मंगलमय संत समाजू। जो जग जंगम तीरथराजू।।
English explanation
The company of saints is full of joy and auspiciousness; it is the king of pilgrimage places moving through the world.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुद | आनंद | joy |
| मंगलमय | मंगल से भरा | full of auspiciousness |
| संत | संतों का | of saints |
| समाजू | समाज | company |
| जो | जो | which |
| जग | जगत में | in the world |
| जंगम | चलता-फिरता | moving about |
| तीरथराजू | तीर्थों का राजा, प्रयाग | king of pilgrimage places, Prayag |
2 राम भक्ति जहँ सुरसरि धारा। सरसइ ब्रह्म बिचार प्रचारा।।
English explanation
There, devotion to Rama is the stream of the Ganges, and the dissemination of reflection on Brahman is the Saraswati.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | भगवान राम की | to Lord Rama |
| भक्ति | भक्ति | devotion |
| जहँ | जहाँ, उस संत-समाज में | where, in that company of saints |
| सुरसरि | गंगा की | of the Ganges |
| धारा | धारा | stream |
| सरसइ | सरस्वती नदी | the Saraswati River |
| ब्रह्म | परम सत्य ब्रह्म का | on Brahman, ultimate reality |
| बिचार | विचार | reflection |
| प्रचारा | प्रसार | dissemination |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.2
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 21
- सहायक विषय
- ब्राह्मण-संत-वन्दना
- मुद्रित पृष्ठ
- 20, 21
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।