बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बिधि निषेधमय कलि मल हरनी। करम कथा रबिनंदनि बरनी।।
मूल पाठ
बिधि निषेधमय कलि मल हरनी। करम कथा रबिनंदनि बरनी।।
हरि हर कथा बिराजति बेनी। सुनत सकल मुद मंगल देनी।।
स्रोत अभिलेख 1.2 · पुस्तक पृ. 20, 21
भावार्थ
मूल पाठ के बादविधि और निषेध (यह करो और यह न करो) रूपी कर्मोंकी कथा कलियुगके पापोंको हरनेवाली सूर्यतनया यमुनाजी हैं और भगवान् विष्णु और शङ्करजीकी कथाएँ त्रिवेणीरूपसे सुशोभित हैं, जो सुनते ही सब आनन्द और कल्याणोंकी देनेवाली हैं॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 21 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 बिधि निषेधमय कलि मल हरनी। करम कथा रबिनंदनि बरनी।।
English explanation
Discourse on action, containing prescriptions and prohibitions and removing the impurities of the age of Kali, is described as the Yamuna.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिधि | विहित कर्तव्यों की विधि | prescriptions for duty |
| निषेधमय | निषेधों से युक्त | containing prohibitions |
| कलि | कलियुग के | of the age of Kali |
| मल | मल या कलुष | impurities |
| हरनी | हरने वाली | removing |
| करम | कर्मों की | on actions and duties |
| कथा | कथा या विवेचन | discourse |
| रबिनंदनि | सूर्यपुत्री यमुना | Yamuna, daughter of the sun |
| बरनी | वर्णित की गई | is described as |
2 हरि हर कथा बिराजति बेनी। सुनत सकल मुद मंगल देनी।।
English explanation
The discourse on Vishnu and Shiva shines there as the three-river confluence, bestowing every joy and blessing upon hearing.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हरि | भगवान विष्णु की | of Vishnu |
| हर | भगवान शिव की | of Shiva |
| कथा | कथा | discourse |
| बिराजति | सुशोभित है | shines |
| बेनी | त्रिवेणी संगम | the three-river confluence |
| सुनत | सुनने पर | upon hearing |
| सकल | समस्त | all |
| मुद | आनंद | joy |
| मंगल | मंगल | blessings |
| देनी | देने वाली | bestowing |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.2
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 21
- सहायक विषय
- ब्राह्मण-संत-वन्दना
- मुद्रित पृष्ठ
- 20, 21
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।