बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बटु बिस्वास अचल निज धरमा। तीरथराज समाज सुकरमा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्द[उस संतसमाजरूपी प्रयागमें] अपने धर्ममें जो अटल विश्वास है वह अक्षयवट है, और शुभकर्म ही उस तीर्थराजका समाज (परिकर) है। वह (संतसमाजरूपी प्रयागराज) सब देशोंमें, सब समय सभीको सहजहीमें प्राप्त हो सकता है और आदरपूर्वक सेवन करनेसे क्लेशोंको नष्ट करनेवाला है॥ ६॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 21 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
बटु बिस्वास अचल निज धरमा। तीरथराज समाज सुकरमा।।
सबहिं सुलभ सब दिन सब देसा। सेवत सादर समन कलेसा।।
स्रोत अभिलेख 1.2 · पुस्तक पृ. 20, 21
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 बटु बिस्वास अचल निज धरमा। तीरथराज समाज सुकरमा।।
English explanation
Unwavering faith in one’s own duty is the banyan tree there, and the company of saints devoted to good deeds is the king of pilgrimage places.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बटु | वटवृक्ष | banyan tree |
| बिस्वास | विश्वास | faith |
| अचल | अडिग | unwavering |
| निज | अपने | one’s own |
| धरमा | धर्म या कर्तव्य में | in religious duty |
| तीरथराज | तीर्थों का राजा | king of pilgrimage places |
| समाज | संतों का समुदाय | company of saints |
| सुकरमा | शुभ कर्मों वाला | devoted to good deeds |
2 सबहिं सुलभ सब दिन सब देसा। सेवत सादर समन कलेसा।।
English explanation
It is accessible to everyone, every day, in every land; reverent attendance upon it alleviates afflictions.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सबहिं | सभी को | to everyone |
| सुलभ | सहज उपलब्ध | readily accessible |
| सब | सभी | all |
| दिन | दिनों में | days |
| सब | सभी | all |
| देसा | देशों में | in lands |
| सेवत | सेवा या संगति करने पर | upon attending or serving |
| सादर | आदरपूर्वक | reverently |
| समन | शमन | alleviation |
| कलेसा | क्लेशों का | of afflictions |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.2
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 21
- सहायक विषय
- ब्राह्मण-संत-वन्दना
- मुद्रित पृष्ठ
- 20, 21
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।