बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अकथ अलौकिक तीरथराऊ। देइ सद्य फल प्रगट प्रभाऊ।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दवह तीर्थराज अलौकिक और अकथनीय है, एवं तत्काल फल देनेवाला है; उसका प्रभाव प्रत्यक्ष है॥ ७॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 21 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
अकथ अलौकिक तीरथराऊ। देइ सद्य फल प्रगट प्रभाऊ।।
स्रोत अभिलेख 1.2 · पुस्तक पृ. 20, 21
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 अकथ अलौकिक तीरथराऊ। देइ सद्य फल प्रगट प्रभाऊ।।
English explanation
This king of pilgrimage places is indescribable and extraordinary; it grants immediate results, and its power is manifest.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अकथ | अवर्णनीय | indescribable |
| अलौकिक | साधारण जगत से निराला | beyond the ordinary |
| तीरथराऊ | तीर्थों का राजा | king of pilgrimage places |
| देइ | देता है | gives |
| सद्य | तुरंत | immediately |
| फल | फल | results |
| प्रगट | प्रत्यक्ष | manifest |
| प्रभाऊ | प्रभाव | power or efficacy |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.2
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 21
- सहायक विषय
- ब्राह्मण-संत-वन्दना
- मुद्रित पृष्ठ
- 20, 21
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।