बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
उघरहिं बिमल बिलोचन ही के। मिटहिं दोष दुख भव रजनी के।।
मूल पाठ
उघरहिं बिमल बिलोचन ही के। मिटहिं दोष दुख भव रजनी के।।
सूझहिं राम चरित मनि मानिक। गुपुत प्रगट जहँ जो जेहि खानिक।।
स्रोत अभिलेख 1.1 · पुस्तक पृ. 19, 20
भावार्थ
मूल पाठ के बादउसके हृदयमें आते ही हृदयके निर्मल नेत्र खुल जाते हैं और संसाररूपी रात्रिके दोष-दु:ख मिट जाते हैं एवं श्रीरामचरित्ररूपी मणि और माणिक्य, गुप्त और प्रकट जहाँ जो जिस खानमें है, सब दिखायी पडऩे लगते हैं—॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 20 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 उघरहिं बिमल बिलोचन ही के। मिटहिं दोष दुख भव रजनी के।।
English explanation
The pure eyes of the heart open, and the faults and sorrows of the night of worldly existence disappear.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उघरहिं | खुल जाते हैं | open |
| बिमल | निर्मल | pure |
| बिलोचन | नेत्र | eyes |
| ही | हृदय | of the heart |
| के | के | belonging to |
| मिटहिं | मिट जाते हैं | disappear |
| दोष | दोष | faults |
| दुख | दुःख | sorrows |
| भव | संसाररूपी | of worldly existence |
| रजनी | रात | night |
| के | के | belonging to |
2 सूझहिं राम चरित मनि मानिक। गुपुत प्रगट जहँ जो जेहि खानिक।।
English explanation
The gems and rubies of Rama’s deeds become visible, whether hidden or manifest in whichever mine they lie.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सूझहिं | दिखने लगते हैं | become visible |
| राम | राम के | of Rama |
| चरित | चरित्र के | of the deeds |
| मनि | रत्न | gems |
| मानिक | माणिक्य | rubies |
| गुपुत | छिपे हुए | hidden |
| प्रगट | प्रकट | manifest |
| जहँ | जहाँ | wherever |
| जो | जो | whatever |
| जेहि | जिस | in whichever |
| खानिक | खान में | mine |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.1
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 20
- सहायक विषय
- गुरु-वन्दना
- मुद्रित पृष्ठ
- 19, 20
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।