बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
श्रीगुर पद नख मनि गन जोती। सुमिरत दिब्य द्रृष्टि हियँ होती।।
मूल पाठ
श्रीगुर पद नख मनि गन जोती। सुमिरत दिब्य द्रृष्टि हियँ होती।।
दलन मोह तम सो सप्रकासू। बड़े भाग उर आवइ जासू।।
स्रोत अभिलेख 1.1 · पुस्तक पृ. 19, 20
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रीगुरु महाराजके चरण-नखोंकी ज्योति मणियोंके प्रकाशके समान है, जिसके स्मरण करते ही हृदयमें दिव्य दृष्टि उत्पन्न हो जाती है। वह प्रकाश अज्ञानरूपी अन्धकारका नाश करनेवाला है; वह जिसके हृदयमें आ जाता है, उसके बड़े भाग्य हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 19 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 श्रीगुर पद नख मनि गन जोती। सुमिरत दिब्य द्रृष्टि हियँ होती।।
English explanation
The nails of the revered teacher’s feet shine like a cluster of jewels; remembering them awakens divine vision in the heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| श्रीगुर | पूज्य गुरु के | of the revered teacher |
| पद | चरणों | feet |
| नख | नाखून | nails |
| मनि | रत्नों | jewels |
| गन | समूह | the cluster |
| जोती | ज्योति | radiance |
| सुमिरत | स्मरण करने पर | on remembering |
| दिब्य | दिव्य | divine |
| द्रृष्टि | दृष्टि | vision |
| हियँ | हृदय में | in the heart |
| होती | होती है | arises |
2 दलन मोह तम सो सप्रकासू। बड़े भाग उर आवइ जासू।।
English explanation
That bright radiance destroys the darkness of delusion and enters one’s heart through great good fortune.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दलन | नष्ट करने वाली | destroying |
| मोह | अज्ञान / आसक्ति | delusion / attachment |
| तम | अंधकार | darkness |
| सो | वह | that |
| सप्रकासू | तेजस्वी ज्योति | bright radiance |
| बड़े | महान | great |
| भाग | सौभाग्य से | through good fortune |
| उर | हृदय में | into the heart |
| आवइ | आती है | enters |
| जासू | जिसके | of the one in whom |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.1
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 19
- सहायक विषय
- गुरु-वन्दना
- मुद्रित पृष्ठ
- 19, 20
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।