बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुकृति संभु तन बिमल बिभूती। मंजुल मंगल मोद प्रसूती।।
मूल पाठ
सुकृति संभु तन बिमल बिभूती। मंजुल मंगल मोद प्रसूती।।
जन मन मंजु मुकुर मल हरनी। किएँ तिलक गुन गन बस करनी।।
स्रोत अभिलेख 1.1 · पुस्तक पृ. 19, 20
भावार्थ
मूल पाठ के बादवह रज सुकृती (पुण्यवान् पुरुष) रूपी शिवजीके शरीरपर सुशोभित निर्मल विभूति है और सुन्दर कल्याण और आनन्दकी जननी है, भक्तके मनरूपी सुन्दर दर्पणके मैलको दूर करनेवाली और तिलक करनेसे गुणोंके समूहको वशमें करनेवाली है॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 19 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सुकृति संभु तन बिमल बिभूती। मंजुल मंगल मोद प्रसूती।।
English explanation
It is like the pure sacred ash on the body of Shiva personified as merit, producing beautiful auspiciousness and joy.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुकृति | पुण्यरूपी | in the form of merit |
| संभु | शिव | Shiva |
| तन | शरीर | body |
| बिमल | निर्मल | pure |
| बिभूती | पवित्र भस्म | sacred ash |
| मंजुल | सुंदर | beautiful |
| मंगल | कल्याण | auspiciousness |
| मोद | आनंद | joy |
| प्रसूती | उत्पन्न करने वाली | giving rise to |
2 जन मन मंजु मुकुर मल हरनी। किएँ तिलक गुन गन बस करनी।।
English explanation
It cleanses the beautiful mirror of devotees’ minds; applying it as a forehead mark brings the multitude of virtues within one’s grasp.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जन | भक्तों के | of devotees |
| मन | मन | mind |
| मंजु | सुंदर | beautiful |
| मुकुर | दर्पण | mirror |
| मल | मैल | impurity |
| हरनी | हरने वाली | removing |
| किएँ | लगाने पर | when applied |
| तिलक | तिलक | a forehead mark |
| गुन | गुणों | virtues |
| गन | समूह | the multitude |
| बस | वश में | under one’s command |
| करनी | करने वाली | bringing |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.1
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 19
- सहायक विषय
- गुरु-वन्दना
- मुद्रित पृष्ठ
- 19, 20
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।