बालकाण्ड · दोहा 3 (ख) · दोहा/सोरठा
संत सरल चित जगत हित जानि सुभाउ सनेहु।
संत सरल चित जगत हित जानि सुभाउ सनेहु।
बालबिनय सुनि करि कृपा राम चरन रति देहु।।3(ख)।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.3 · पुस्तक पृ. 21, 23
भावार्थ और शब्दार्थ
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1 संत सरल चित जगत हित जानि सुभाउ सनेहु।
हे सरलचित्त और जगत के हितकारी संतों! आपका स्नेहमय स्वभाव जानकर मैं यह विनती करता हूँ—
English explanation
O simple-hearted saints who seek the world’s welfare! Knowing your loving nature, I make this plea—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| संत | हे संतों | O saints |
| सरल | सरल; निष्कपट | simple; guileless |
| चित | चित्त वाले | hearted |
| जगत | संसार का | of the world |
| हित | हित करने वाले | seeking welfare |
| जानि | जानकर | knowing |
| सुभाउ | स्वभाव | nature; disposition |
| सनेहु | स्नेह; प्रेम | affection; love |
2 बालबिनय सुनि करि कृपा राम चरन रति देहु।।3(ख)।।
मेरी बालक-जैसी विनती सुनकर कृपा कीजिए और मुझे राम के चरणों में प्रेम दीजिए।
English explanation
Hear my childlike plea, show compassion, and grant me love for Rama’s feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बालबिनय | बालक-जैसी विनती | childlike plea |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| करि | करके | showing; having done |
| कृपा | कृपा | compassion; grace |
| राम | भगवान राम के | of Lord Rama |
| चरन | चरणों में | for the feet |
| रति | प्रेम; अनुराग | love; devotion |
| देहु | दीजिए | please grant |
| ख | दोहा ३ के भाग (ख) का संदर्भ-चिह्न | reference marker for part (b) of verse 3 |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 3 (ख)
- स्रोत अभिलेख
- 1.3
- सहायक विषय
- ब्राह्मण-संत-वन्दना
- मुद्रित पृष्ठ
- 21, 23
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