उत्तरकाण्ड · श्लोक · श्लोक
केकीकण्ठाभनीलं सुरवरविलसद्विप्रपादाब्जचिह्नं
मूल पाठ
केकीकण्ठाभनीलं सुरवरविलसद्विप्रपादाब्जचिह्नं
शोभाढ्यं पीतवस्त्रं सरसिजनयनं सर्वदा सुप्रसन्नम्।
पाणौ नाराचचापं कपिनिकरयुतं बन्धुना सेव्यमानं
नौमीड्यं जानकीशं रघुवरमनिशं पुष्पकारूढरामम्॥१॥
स्रोत अभिलेख मंगलाचरण · पुस्तक पृ. 905, 906
भावार्थ
मूल पाठ के बादमोरके कण्ठकी आभाके समान (हरिताभ) नीलवर्ण, देवताओंमें श्रेष्ठ, ब्राह्मण (भृगुजी) के चरणकमलके चिह्नसे सुशोभित, शोभासे पूर्ण, पीताम्बरधारी, कमलनेत्र, सदा परम प्रसन्न, हाथोंमें बाण और धनुष धारण किये हुए, वानरसमूहसे युक्त, भाई लक्ष्मणजीसे सेवित, स्तुति किये जाने योग्य, श्रीजानकीजीके पति, रघुकुलश्रेष्ठ, पुष्पकविमानपर सवार श्रीरामचन्द्रजीको मैं निरन्तर नमस्कार करता हूँ॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 905 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1केकीकण्ठाभनीलं सुरवरविलसद्विप्रपादाब्जचिह्नं
English explanation
I bow to Rama, blue like a peacock’s neck, foremost among the gods, bearing the shining mark of a Brahmin’s lotus foot.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| केकीकण्ठाभनीलं | मोर के कंठ जैसी आभा वाले नीले राम को | to Rama, blue like a peacock’s neck |
| सुरवरविलसद्विप्रपादाब्जचिह्नं | देवों में श्रेष्ठ, सुशोभित ब्राह्मण-चरण-कमल का चिह्न धारण करने वाले | foremost among the gods, bearing a shining Brahmin’s lotus-foot mark |
2शोभाढ्यं पीतवस्त्रं सरसिजनयनं सर्वदा सुप्रसन्नम्।
English explanation
He is resplendent, clad in yellow, lotus-eyed, and always serene and gracious.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| शोभाढ्यं | शोभा से संपन्न | resplendent |
| पीतवस्त्रं | पीले वस्त्र धारण किए हुए | clad in yellow garments |
| सरसिजनयनं | कमल जैसे नेत्र वाले | lotus-eyed |
| सर्वदा | सदा | always |
| सुप्रसन्नम् | अत्यंत प्रसन्न और शांत | deeply serene and gracious |
3पाणौ नाराचचापं कपिनिकरयुतं बन्धुना सेव्यमानं
English explanation
He holds arrows and a bow in his hand, is accompanied by a host of monkeys, and is served by his brother Lakshmana.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पाणौ | हाथ में | in the hand |
| नाराचचापं | बाण और धनुष धारण करने वाले | holding arrows and a bow |
| कपिनिकरयुतं | वानरों के समूह से युक्त | accompanied by a host of monkeys |
| बन्धुना | भाई लक्ष्मण द्वारा | by his brother Lakshmana |
| सेव्यमानं | सेवा किए जा रहे | being served |
4नौमीड्यं जानकीशं रघुवरमनिशं पुष्पकारूढरामम्॥१॥
English explanation
I continually bow to venerable Rama, Janaki’s husband, the foremost of Raghu’s lineage, seated aboard the Pushpaka aerial chariot.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नौमीड्यं | मैं पूजनीय को प्रणाम करता हूँ | I bow to the venerable one |
| जानकीशं | जानकी के पति को | to Janaki’s husband |
| रघुवरमनिशं | रघुवंश में श्रेष्ठ को निरंतर | to the foremost of Raghu’s lineage, continually |
| पुष्पकारूढरामम् | पुष्पक विमान पर आरूढ़ राम को | to Rama seated aboard the Pushpaka aerial chariot |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- श्लोक
- स्रोत अभिलेख
- मंगलाचरण
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 905
- सहायक विषय
- मंगलाचरण
- मुद्रित पृष्ठ
- 905, 906
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।