रामचरितमानस · काण्ड 07
उत्तरकाण्ड
872 पद · दोहे, सोरठे, चौपाइयाँ, छंद और श्लोक। पहले PDF भावार्थ, फिर मूल पाठ और शब्द-दर-शब्द अर्थ।
872 कुल पद203 दोहा16 सोरठा595 चौपाई47 छंद11 श्लोक
भावार्थ: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण के PDF से; शब्द-दर-शब्द अर्थ AI प्रारूप हैं और समीक्षा बाकी है।
203दोहेउत्तरकाण्ड के दोहे →16सोरठेउत्तरकाण्ड के सोरठे →595चौपाइयाँउत्तरकाण्ड की चौपाइयाँ →47छंदउत्तरकाण्ड के छंद →11श्लोकउत्तरकाण्ड के श्लोक →
पढ़ना शुरू करें
श्लोक
केकीकण्ठाभनीलं सुरवरविलसद्विप्रपादाब्जचिह्नंमोरके कण्ठकी आभाके समान (हरिताभ) नीलवर्ण, देवताओंमें श्रेष्ठ, ब्राह्मण (भृगुजी) के चरणकमलक…श्लोककोसलेन्द्रपदकञ्जमञ्जुलौ कोमलावजमहेशवन्दितौकोसलपुरीके स्वामी श्रीरामचन्द्रजीके सुन्दर और कोमल दोनों चरणकमल ब्रह्माजी और शिवजीके द्वार…श्लोककुन्दइन्दुदरगौरसुन्दरं अम्बिकापतिमभीष्टसिद्धिदम्कुन्दके फूल, चन्द्रमा और शङ्खके समान सुन्दर गौरवर्ण, जगज्जननी श्रीपार्वतीजीके पति, वाञ्छित…दोहा रहा एक दिन अवधि कर[श्रीरामजीके लौटनेकी] अवधिका एक ही दिन बाकी रह गया, अतएव नगरके लोग बहुत आतुर (अधीर) हो रहे…