उत्तरकाण्ड · दोहा · दोहा
रहा एक दिन अवधि कर अति आरत पुर लोग।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्द[श्रीरामजीके लौटनेकी] अवधिका एक ही दिन बाकी रह गया, अतएव नगरके लोग बहुत आतुर (अधीर) हो रहे हैं। रामके वियोगमें दुबले हुए स्त्री-पुरुष जहाँ-तहाँ सोच (विचार) कर रहे हैं [कि क्या बात है, श्रीरामजी क्यों नहीं आये]।
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 906 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
रहा एक दिन अवधि कर अति आरत पुर लोग।
जहँ तहँ सोचहिं नारि नर कृस तन राम बियोग॥
स्रोत अभिलेख मंगलाचरण · पुस्तक पृ. 905, 906
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1रहा एक दिन अवधि कर अति आरत पुर लोग।
English explanation
AI-generated draft: One day remained of the exile period; the townspeople were deeply distressed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रहा | शेष रह गया था | remained |
| एक | एक | one |
| दिन | दिन | day |
| अवधि | नियत वनवास-अवधि | the appointed exile period |
| कर | का | of |
| अति | अत्यंत | extremely |
| आरत | व्याकुल | distressed |
| पुर | नगर के | of the town |
| लोग | लोग | people |
2जहँ तहँ सोचहिं नारि नर कृस तन राम बियोग॥
English explanation
Everywhere, women and men were anxious, their bodies grown thin from separation from Rama.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जहँ | जहाँ | where |
| तहँ | तहाँ; जहाँ-तहाँ मिलकर सर्वत्र | there; together, everywhere |
| सोचहिं | चिंता करते हैं | worry |
| नारि | स्त्रियाँ | women |
| नर | पुरुष | men |
| कृस | दुबले | emaciated |
| तन | शरीर | bodies |
| राम | श्रीराम के | from Rama |
| बियोग | वियोग में | in separation |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा
- स्रोत अभिलेख
- मंगलाचरण
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 906
- सहायक विषय
- मंगलाचरण
- मुद्रित पृष्ठ
- 905, 906
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