सुन्दरकाण्ड · श्लोक · श्लोक
नान्या स्पृहा रघुपते हृदयेऽस्मदीये
मूल पाठ
नान्या स्पृहा रघुपते हृदयेऽस्मदीये
सत्यं वदामि च भवानखिलान्तरात्मा।
भक्तिं प्रयच्छ रघुपुङ्गव निर्भरां मे
कामादिदोषरहितं कुरु मानसं च॥२॥
स्रोत अभिलेख मंगलाचरण · पुस्तक पृ. 713, 714
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे रघुनाथजी! मैं सत्य कहता हूँ और फिर आप सबके अन्तरात्मा ही हैं (सब जानते ही हैं) कि मेरे हृदयमें दूसरी कोई इच्छा नहीं है। हे रघुकुलश्रेष्ठ! मुझे अपनी निर्भरा (पूर्ण) भक्ति दीजिये और मेरे मनको काम आदि दोषोंसे रहित कीजिये॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 713 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1नान्या स्पृहा रघुपते हृदयेऽस्मदीये
English explanation
O Lord of Raghu’s lineage, there is no other longing in my heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नान्या | कोई दूसरी नहीं | no other |
| स्पृहा | अभिलाषा | longing |
| रघुपते | हे रघुवंश के स्वामी राम | O Rama, Lord of Raghu’s lineage |
| हृदयेऽस्मदीये | मेरे हृदय में | in my heart |
2सत्यं वदामि च भवानखिलान्तरात्मा।
English explanation
I speak the truth, and you are the inner Self of all.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सत्यं | सत्य | the truth |
| वदामि | मैं कहता हूँ | I speak |
| च | और | and |
| भवानखिलान्तरात्मा | आप सबके अंतरात्मा हैं | you are the inner Self of all |
3भक्तिं प्रयच्छ रघुपुङ्गव निर्भरां मे
English explanation
O Rama, foremost of Raghu’s lineage, grant me wholehearted devotion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भक्तिं | भक्ति | devotion |
| प्रयच्छ | प्रदान कीजिए | grant |
| रघुपुङ्गव | हे रघुवंश में श्रेष्ठ राम | O Rama, foremost of Raghu’s lineage |
| निर्भरां | परिपूर्ण, प्रगाढ़ | wholehearted, abundant |
| मे | मुझे | to me |
4कामादिदोषरहितं कुरु मानसं च॥२॥
English explanation
And make my mind free from desire and other faults.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कामादिदोषरहितं | काम आदि दोषों से रहित | free from desire and other faults |
| कुरु | कर दीजिए | make |
| मानसं | मन को | the mind |
| च | और | and |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- श्लोक
- स्रोत अभिलेख
- मंगलाचरण
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 713
- सहायक विषय
- मंगलाचरण
- मुद्रित पृष्ठ
- 713, 714
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।