सुन्दरकाण्ड · श्लोक · श्लोक
अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दअतुल बलके धाम, सोनेके पर्वत (सुमेरु) के समान कान्तियुक्त शरीरवाले, दैत्यरूपी वन [को ध्वंस करने] के लिये अग्रिरूप, ज्ञानियोंमें अग्रगण्य, सम्पूर्ण गुणोंके निधान, वानरोंके स्वामी, श्रीरघुनाथजीके प्रिय भक्त पवनपुत्र श्रीहनुमान्जीको मैं प्रणाम करता हूँ॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 714 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं
दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्।
सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं
रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि॥३॥
स्रोत अभिलेख मंगलाचरण · पुस्तक पृ. 713, 714
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं
English explanation
Who is the abode of incomparable strength and whose body resembles a golden mountain—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अतुलितबलधामं | अतुलनीय बल के धाम | the abode of incomparable strength |
| हेमशैलाभदेहं | स्वर्ण-पर्वत के समान शरीर वाले | having a body like a golden mountain |
2दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्।
English explanation
Who is fire to the forest of demons and foremost among the wise—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दनुजवनकृशानुं | दानवरूपी वन को जलाने वाली अग्नि | fire that consumes the forest of demons |
| ज्ञानिनामग्रगण्यम् | ज्ञानियों में अग्रगण्य | foremost among the wise |
3सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं
English explanation
Who is the treasury of every virtue and lord of the monkeys—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सकलगुणनिधानं | समस्त गुणों के भंडार | the treasury of every virtue |
| वानराणामधीशं | वानरों के अधीश्वर | lord of the monkeys |
4रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि॥३॥
English explanation
I bow to Hanuman, son of the Wind and beloved devotee of Rama.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रघुपतिप्रियभक्तं | रघुनाथ राम के प्रिय भक्त | the beloved devotee of Rama |
| वातजातं | पवन से उत्पन्न, पवनपुत्र हनुमान | born of the Wind, Hanuman the Wind’s son |
| नमामि | मैं प्रणाम करता हूँ | I bow to |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- श्लोक
- स्रोत अभिलेख
- मंगलाचरण
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 714
- सहायक विषय
- मंगलाचरण
- मुद्रित पृष्ठ
- 713, 714
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।