सुन्दरकाण्ड · श्लोक · श्लोक
शान्तं शाश्वतमप्रमेयमनघं निर्वाणशान्तिप्रदं
मूल पाठ
शान्तं शाश्वतमप्रमेयमनघं निर्वाणशान्तिप्रदं
ब्रह्माशम्भुफणीन्द्रसेव्यमनिशं वेदान्तवेद्यं विभुम्।
रामाख्यं जगदीश्वरं सुरगुरुं मायामनुष्यं हरिं
वन्देऽहं करुणाकरं रघुवरं भूपालचूडामणिम्॥१॥
स्रोत अभिलेख मंगलाचरण · पुस्तक पृ. 713, 714
भावार्थ
मूल पाठ के बादशान्त, सनातन, अप्रमेय (प्रमाणोंसे परे), निष्पाप, मोक्षरूप परमशान्ति देनेवाले, ब्रह्मा, शम्भु और शेषजीसे निरन्तर सेवित, वेदान्तके द्वारा जाननेयोग्य, सर्वव्यापक, देवताओंमें सबसे बड़े, मायासे मनुष्यरूपमें दीखनेवाले, समस्त पापोंको हरनेवाले, करुणाकी खान, रघुकुलमें श्रेष्ठ तथा राजाओंके शिरोमणि, राम कहलानेवाले जगदीश्वरकी मैं वन्दना करता हूँ॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 713 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1शान्तं शाश्वतमप्रमेयमनघं निर्वाणशान्तिप्रदं
English explanation
Who is serene, eternal, beyond measure, sinless, and bestows the peace of liberation—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| शान्तं | शांत स्वरूप वाले | serene |
| शाश्वतमप्रमेयमनघं | शाश्वत, अप्रमेय और निष्पाप | eternal, beyond measure, and sinless |
| निर्वाणशान्तिप्रदं | मोक्ष की शांति प्रदान करने वाले | bestowing the peace of liberation |
2ब्रह्माशम्भुफणीन्द्रसेव्यमनिशं वेदान्तवेद्यं विभुम्।
English explanation
Who is continually served by Brahma, Shiva, and Shesha, king of serpents; knowable through Vedanta, and all-pervading—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ब्रह्माशम्भुफणीन्द्रसेव्यमनिशं | ब्रह्मा, शिव और नागराज शेष द्वारा निरंतर सेवित | continually served by Brahma, Shiva, and Shesha, king of serpents |
| वेदान्तवेद्यं | वेदांत द्वारा जानने योग्य | knowable through Vedanta |
| विभुम् | सर्वव्यापी प्रभु | the all-pervading Lord |
3रामाख्यं जगदीश्वरं सुरगुरुं मायामनुष्यं हरिं
English explanation
Who is named Rama, Lord of the world, teacher of the gods, and Hari appearing as a human through his own maya—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रामाख्यं | राम नाम वाले | named Rama |
| जगदीश्वरं | जगत के ईश्वर | Lord of the world |
| सुरगुरुं | देवताओं के गुरु | teacher of the gods |
| मायामनुष्यं | अपनी माया से मनुष्यरूप धारण करने वाले | appearing as a human through his own maya |
| हरिं | हरि, अर्थात विष्णु | Hari, Vishnu |
4वन्देऽहं करुणाकरं रघुवरं भूपालचूडामणिम्॥१॥
English explanation
I bow to that Rama, the fountain of compassion, foremost of Raghu’s lineage and crown jewel among kings.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| वन्देऽहं | मैं प्रणाम करता हूँ | I bow to |
| करुणाकरं | करुणा के भंडार | the fountain of compassion |
| रघुवरं | रघुवंश में श्रेष्ठ राम | Rama, foremost of Raghu’s lineage |
| भूपालचूडामणिम् | राजाओं के शिरोमणि | the crown jewel among kings |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- श्लोक
- स्रोत अभिलेख
- मंगलाचरण
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 713
- सहायक विषय
- मंगलाचरण
- मुद्रित पृष्ठ
- 713, 714
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।