किष्किन्धाकाण्ड · श्लोक · श्लोक
ब्रह्माम्भोधिसमुद्भवं कलिमलप्रध्वंसनं चाव्ययं
मूल पाठ
ब्रह्माम्भोधिसमुद्भवं कलिमलप्रध्वंसनं चाव्ययं
श्रीमच्छम्भुमुखेन्दुसुन्दरवरे संशोभितं सर्वदा।
संसारामयभेषजं सुखकरं श्रीजानकीजीवनं
धन्यास्ते कृतिनः पिबन्ति सततं श्रीरामनामामृतम्॥२॥
स्रोत अभिलेख मंगलाचरण · पुस्तक पृ. 681, 682
भावार्थ
मूल पाठ के बादवे सुकृती (पुण्यात्मा पुरुष) धन्य हैं जो वेदरूपी समुद्र [के मथने] से उत्पन्न हुए कलियुगके मलको सर्वथा नष्ट कर देनेवाले, अविनाशी, भगवान् श्रीशम्भुके सुन्दर एवं श्रेष्ठ मुखरूपी चन्द्रमामें सदा शोभायमान, जन्म-मरणरूपी रोगके औषध, सबको सुख देनेवाले और श्रीजानकीजीके जीवनस्वरूप श्रीरामनामरूपी अमृतका निरन्तर पान करते रहते हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 681 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1ब्रह्माम्भोधिसमुद्भवं कलिमलप्रध्वंसनं चाव्ययं
English explanation
The nectar of Rama’s name arises from the ocean of Brahman, destroys the impurities of the Kali age, and is imperishable.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ब्रह्माम्भोधिसमुद्भवं | ब्रह्मरूपी समुद्र से उत्पन्न | arisen from the ocean of Brahman |
| कलिमलप्रध्वंसनं | कलियुग के पाप-मल को नष्ट करने वाला | destroying the sinful impurities of the Kali age |
| चाव्ययं | और अविनाशी | and imperishable |
2श्रीमच्छम्भुमुखेन्दुसुन्दरवरे संशोभितं सर्वदा।
English explanation
That nectar of Rama’s name ever shines in the beautiful, excellent moon that is Lord Shiva’s face.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| श्रीमच्छम्भुमुखेन्दुसुन्दरवरे | श्री शंभु के सुंदर, श्रेष्ठ मुखरूपी चंद्रमा में | in the beautiful, excellent moon of Lord Shiva’s face |
| संशोभितं | भली भाँति शोभित | resplendently shining |
| सर्वदा | सदा | always |
3संसारामयभेषजं सुखकरं श्रीजानकीजीवनं
English explanation
It is medicine for the disease of worldly existence, a giver of happiness, and the very life of Janaki.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| संसारामयभेषजं | संसाररूपी रोग की औषधि | medicine for the disease of worldly existence |
| सुखकरं | सुख देने वाला | giving happiness |
| श्रीजानकीजीवनं | श्री जानकी का जीवन | the very life of Janaki (Sita) |
4धन्यास्ते कृतिनः पिबन्ति सततं श्रीरामनामामृतम्॥२॥
English explanation
Blessed are those meritorious people who continually drink the nectar of Rama’s name.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| धन्यास्ते | वे धन्य हैं | blessed are those |
| कृतिनः | पुण्यवान लोग | meritorious people |
| पिबन्ति | पीते हैं | drink |
| सततं | निरंतर | continually |
| श्रीरामनामामृतम् | श्रीराम के नाम का अमृत | the nectar of Lord Rama’s name |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- श्लोक
- स्रोत अभिलेख
- मंगलाचरण
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 681
- सहायक विषय
- मंगलाचरण
- मुद्रित पृष्ठ
- 681, 682
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।