किष्किन्धाकाण्ड · सोरठा · सोरठा
मुक्ति जन्म महि जानि ग्यान खानि अघ हानि कर।
मूल पाठ
मुक्ति जन्म महि जानि ग्यान खानि अघ हानि कर।
जहँ बस संभु भवानि सो कासी सेइअ कस न॥
स्रोत अभिलेख मंगलाचरण · पुस्तक पृ. 681, 682
भावार्थ
मूल पाठ के बादजहाँ श्रीशिव-पार्वती बसते हैं, उस काशीको मुक्तिकी जन्मभूमि, ज्ञानकी खान और पापोंका नाश करनेवाली जानकर उसका सेवन क्यों न किया जाय?
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 682 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1मुक्ति जन्म महि जानि ग्यान खानि अघ हानि कर।
English explanation
Knowing Kashi to be the birthplace of liberation, a mine of knowledge, and a destroyer of sins—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुक्ति | मोक्ष की | of liberation |
| जन्म | जन्म की; उत्पत्ति की | of birth; of origin |
| महि | भूमि | land; ground |
| जानि | जानकर | knowing; recognizing |
| ग्यान | ज्ञान की | of knowledge |
| खानि | खान; भंडार | mine; repository |
| अघ | पापों की | of sins |
| हानि | हानि; नाश | destruction |
| कर | करने वाली | causing; bringing about |
2जहँ बस संभु भवानि सो कासी सेइअ कस न॥
English explanation
Why should one not resort to Kashi, where Shiva and Bhavani dwell?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जहँ | जहाँ | where |
| बस | निवास करते हैं | dwell |
| संभु | शंभु, शिव | Shambhu, Lord Shiva |
| भवानि | भवानी, पार्वती | Bhavani, Goddess Parvati |
| सो | उस | that |
| कासी | काशी नगरी का | to the city of Kashi |
| सेइअ | सेवन किया जाए; वहाँ रहा जाए | one should resort to; dwell in |
| कस | क्यों | why |
| न | नहीं | not |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- सोरठा
- स्रोत अभिलेख
- मंगलाचरण
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 682
- सहायक विषय
- मंगलाचरण
- मुद्रित पृष्ठ
- 681, 682
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