किष्किन्धाकाण्ड · सोरठा · सोरठा
जरत सकल सुर बृंद बिषम गरल जेहिं पान किय।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दजिस भीषण हलाहल विषसे सब देवतागण जल रहे थे उसको जिन्होंने स्वयं पान कर लिया, रे मन्द मन! तू उन शङ्करजीको क्यों नहीं भजता? उनके समान कृपालु [और] कौन है?
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 682 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जरत सकल सुर बृंद बिषम गरल जेहिं पान किय।
तेहि न भजसि मन मंद को कृपाल संकर सरिस॥
स्रोत अभिलेख मंगलाचरण · पुस्तक पृ. 681, 682
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1जरत सकल सुर बृंद बिषम गरल जेहिं पान किय।
English explanation
He who drank the dreadful poison that was scorching the entire host of gods—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जरत | जल रहा था | was burning; was being scorched |
| सकल | समस्त | entire |
| सुर | देवताओं का | of gods |
| बृंद | समुदाय | host; multitude |
| बिषम | भयंकर | dreadful |
| गरल | विष | poison |
| जेहिं | जिन्होंने | who |
| पान | पीने का कार्य | the act of drinking |
| किय | किया | performed |
2तेहि न भजसि मन मंद को कृपाल संकर सरिस॥
English explanation
O foolish mind, you do not worship him! Who is as compassionate as Shankara?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तेहि | उन शिव को | him, Lord Shiva |
| न | नहीं | not |
| भजसि | तू भजता है | you worship |
| मन | हे मन | O mind |
| मंद | मूर्ख | foolish |
| को | कौन | who |
| कृपाल | कृपालु | compassionate |
| संकर | शंकर, शिव | Shankara, Lord Shiva |
| सरिस | के समान | as; equal to |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- सोरठा
- स्रोत अभिलेख
- मंगलाचरण
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 682
- सहायक विषय
- मंगलाचरण
- मुद्रित पृष्ठ
- 681, 682
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