किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
आगें चले बहुरि रघुराया। रिष्यमूक परवत निअराया।।
मूल पाठ
आगें चले बहुरि रघुराया। रिष्यमूक परवत निअराया।।
तहँ रह सचिव सहित सुग्रीवा। आवत देखि अतुल बल सींवा।।
स्रोत अभिलेख 4.1 · पुस्तक पृ. 682, 683
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रीरघुनाथजी फिर आगे चले। ऋष्यमूक पर्वत निकट आ गया। वहाँ (ऋष्यमूक पर्वतपर) मन्त्रियोंसहित सुग्रीव रहते थे। अतुलनीय बलकी सीमा श्रीरामचन्द्रजी और लक्ष्मणजीको आते देखकर—॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 682 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 आगें चले बहुरि रघुराया। रिष्यमूक परवत निअराया।।
English explanation
AI draft: Rama, king of the Raghu lineage, proceeded onward and approached Mount Rishyamukha.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आगें | आगे | onward |
| चले | चले | proceeded |
| बहुरि | फिर | again; then |
| रघुराया | रघुकुल के राजा राम | Rama, king of the Raghu lineage |
| रिष्यमूक | ऋष्यमूक नामक | named Rishyamukha |
| परवत | पर्वत | mountain |
| निअराया | निकट पहुँचे | drew near |
2 तहँ रह सचिव सहित सुग्रीवा। आवत देखि अतुल बल सींवा।।
English explanation
Sugriva lived there with his ministers. Seeing Rama and Lakshmana, the very pinnacle of incomparable strength, approaching—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तहँ | वहाँ | there |
| रह | रहते थे | lived |
| सचिव | मंत्रियों | ministers |
| सहित | के साथ | together with |
| सुग्रीवा | वानरराज सुग्रीव | Sugriva, the monkey king |
| आवत | आते हुए | approaching |
| देखि | देखकर | having seen |
| अतुल | अतुलनीय | incomparable |
| बल | बल की | of strength |
| सींवा | पराकाष्ठा | pinnacle |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.1
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 682
- सहायक विषय
- श्रीरामजीसे हनुमान्जीका मिलना और श्रीराम-सुग्रीवकी मित्रता
- मुद्रित पृष्ठ
- 682, 683
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।