किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अति सभीत कह सुनु हनुमाना। पुरुष जुगल बल रूप निधाना।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दसुग्रीव अत्यन्त भयभीत होकर बोले—हे हनुमान्! सुनो, ये दोनों पुरुष बल और रूपके निधान हैं। तुम ब्रह्मचारीका रूप धारण करके जाकर देखो। अपने हृदयमें उनकी यथार्थ बात जानकर मुझे इशारेसे समझाकर कह देना॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 682 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
अति सभीत कह सुनु हनुमाना। पुरुष जुगल बल रूप निधाना।।
धरि बटु रूप देखु तैं जाई। कहेसु जानि जियँ सयन बुझाई।।
स्रोत अभिलेख 4.1 · पुस्तक पृ. 682, 683
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 अति सभीत कह सुनु हनुमाना। पुरुष जुगल बल रूप निधाना।।
English explanation
Deeply frightened, Sugriva said, “Listen, Hanuman: these two men are repositories of strength and beauty.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अति | अत्यंत | exceedingly |
| सभीत | भयभीत | afraid |
| कह | कहते हैं | says |
| सुनु | सुनो | listen |
| हनुमाना | हे हनुमान | O Hanuman |
| पुरुष | पुरुष | men |
| जुगल | दोनों | the pair |
| बल | बल | strength |
| रूप | सुंदरता | beauty |
| निधाना | के भंडार | repositories of |
2 धरि बटु रूप देखु तैं जाई। कहेसु जानि जियँ सयन बुझाई।।
English explanation
“Assume the guise of a young religious student and go observe them. Learn their intentions and convey them to me by a sign.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| धरि | धारण करके | assuming |
| बटु | युवा ब्रह्मचारी | young religious student |
| रूप | वेश | guise |
| देखु | देखो; परखो | observe; assess |
| तैं | तुम | you |
| जाई | जाकर | having gone |
| कहेसु | कह देना | tell me |
| जानि | जानकर | having learned |
| जियँ | मन का भाव | their inner intention |
| सयन | संकेत से | by a sign |
| बुझाई | समझाकर | making understood |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.1
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 682
- सहायक विषय
- श्रीरामजीसे हनुमान्जीका मिलना और श्रीराम-सुग्रीवकी मित्रता
- मुद्रित पृष्ठ
- 682, 683
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।