किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पठए बालि होहिं मन मैला। भागौं तुरत तजौं यह सैला।।
मूल पाठ
पठए बालि होहिं मन मैला। भागौं तुरत तजौं यह सैला।।
बिप्र रूप धरि कपि तहँ गयऊ। माथ नाइ पूछत अस भयऊ।।
स्रोत अभिलेख 4.1 · पुस्तक पृ. 682, 683
भावार्थ
मूल पाठ के बादयदि वे मनके मलिन बालिके भेजे हुए हों तो मैं तुरंत ही इस पर्वतको छोड़कर भाग जाऊँ। [यह सुनकर] हनुमान्जी ब्राह्मणका रूप धरकर वहाँ गये और मस्तक नवाकर इस प्रकार पूछने लगे—॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 682 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 पठए बालि होहिं मन मैला। भागौं तुरत तजौं यह सैला।।
English explanation
“If they have been sent by Bali and harbor ill intentions, I shall flee at once and leave this mountain.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पठए | भेजे हुए | sent |
| बालि | बालि द्वारा | by Bali, Sugriva’s brother |
| होहिं | यदि हों | if they are |
| मन | मन; नीयत | mind; intention |
| मैला | दूषित; दुर्भावनापूर्ण | tainted; ill-intentioned |
| भागौं | मैं भाग जाऊँ | I shall flee |
| तुरत | तुरंत | immediately |
| तजौं | मैं छोड़ दूँ | I shall abandon |
| यह | यह | this |
| सैला | पर्वत | mountain |
2 बिप्र रूप धरि कपि तहँ गयऊ। माथ नाइ पूछत अस भयऊ।।
English explanation
Hanuman went there in a Brahmin’s guise, bowed his head, and began asking as follows.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिप्र | ब्राह्मण का | a Brahmin’s |
| रूप | वेश | guise |
| धरि | धारण करके | assuming |
| कपि | वानर हनुमान | Hanuman, the monkey |
| तहँ | वहाँ | there |
| गयऊ | गए | went |
| माथ | सिर | head |
| नाइ | झुकाकर | bowing |
| पूछत | पूछने | asking |
| अस | इस प्रकार | thus |
| भयऊ | लगे | began |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.1
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 682
- सहायक विषय
- श्रीरामजीसे हनुमान्जीका मिलना और श्रीराम-सुग्रीवकी मित्रता
- मुद्रित पृष्ठ
- 682, 683
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।