किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
को तुम्ह स्यामल गौर सरीरा। छत्री रूप फिरहु बन बीरा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दहे वीर! साँवले और गोरे शरीरवाले आप कौन हैं, जो क्षत्रियके रूपमें वनमें फिर रहे हैं? हे स्वामी! कठोर भूमिपर कोमल चरणोंसे चलनेवाले आप किस कारण वनमें विचर रहे हैं?॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 682 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
को तुम्ह स्यामल गौर सरीरा। छत्री रूप फिरहु बन बीरा।।
कठिन भूमि कोमल पद गामी। कवन हेतु बिचरहु बन स्वामी।।
स्रोत अभिलेख 4.1 · पुस्तक पृ. 682, 683
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 को तुम्ह स्यामल गौर सरीरा। छत्री रूप फिरहु बन बीरा।।
English explanation
“Who are you, heroes, one dark-complexioned and the other fair, roaming the forest in the guise of warriors?”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| को | कौन | who |
| तुम्ह | तुम दोनों | you two |
| स्यामल | श्याम वर्ण वाले | dark-complexioned |
| गौर | गौर वर्ण वाले | fair-complexioned |
| सरीरा | शरीर वाले | having bodies |
| छत्री | क्षत्रिय का | of a warrior |
| रूप | वेश | guise |
| फिरहु | घूम रहे हो | you roam |
| बन | वन में | in the forest |
| बीरा | हे वीरों | O heroes |
2 कठिन भूमि कोमल पद गामी। कवन हेतु बिचरहु बन स्वामी।।
English explanation
“O lords, you tread hard ground with tender feet; for what reason do you wander in the forest?”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कठिन | कठोर | hard |
| भूमि | भूमि पर | on the ground |
| कोमल | कोमल | tender |
| पद | पैरों से | with feet |
| गामी | चलने वाले | walking |
| कवन | किस | what |
| हेतु | कारण से | for reason |
| बिचरहु | विचरते हो | you wander |
| बन | वन में | in the forest |
| स्वामी | हे स्वामियों | O lords |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.1
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 682
- सहायक विषय
- श्रीरामजीसे हनुमान्जीका मिलना और श्रीराम-सुग्रीवकी मित्रता
- मुद्रित पृष्ठ
- 682, 683
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।