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रामचरितमानस
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किष्किन्धाकाण्ड · सोरठा
किष्किन्धाकाण्ड के सोरठे
2 पद · हर पद का मूल पाठ, PDF भावार्थ और शब्द-दर-शब्द अर्थ अलग पृष्ठ पर।
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सोरठा
मुक्ति जन्म महि जानि ग्यान
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सोरठा
जरत सकल सुर बृंद बिषम
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