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रामचरितमानस
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किष्किन्धाकाण्ड · छंद
किष्किन्धाकाण्ड के छंद
3 पद · हर पद का मूल पाठ, PDF भावार्थ और शब्द-दर-शब्द अर्थ अलग पृष्ठ पर।
दोहा (32)
सोरठा (2)
चौपाई (154)
श्लोक (2)
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छंद
सो नयन गोचर जासु गुन
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छंद
अब नाथ करि करुना बिलोकहु
→
छंद
कपि सेन संग सँघारि निसिचर
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