अयोध्याकाण्ड · श्लोक · श्लोक
यस्याङ्के च विभाति भूधरसुता देवापगा मस्तके
मूल पाठ
यस्याङ्के च विभाति भूधरसुता देवापगा मस्तके
भाले बालविधुर्गले च गरलं यस्योरसि व्यालराट्।
सोऽयं भूतिविभूषणः सुरवरः सर्वाधिपः सर्वदा
शर्वः सर्वगतः शिवः शशिनिभः श्रीशङ्करः पातु माम्॥१॥
स्रोत अभिलेख मंगलाचरण · पुस्तक पृ. 343, 343
भावार्थ
मूल पाठ के बादजिनकी गोदमें हिमाचलसुता पार्वतीजी, मस्तकपर गङ्गाजी, ललाटपर द्वितीयाका चन्द्रमा, कण्ठमें हलाहल विष और वक्ष:स्थलपर सर्पराज शेषजी सुशोभित हैं, वे भस्मसे विभूषित, देवताओंमें श्रेष्ठ, सर्वेश्वर, संहारकर्ता [या भक्तोंके पापनाशक], सर्वव्यापक, कल्याणरूप, चन्द्रमाके समान शुभ्रवर्ण श्रीशङ्करजी सदा मेरी रक्षा करें॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 343 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1यस्याङ्के च विभाति भूधरसुता देवापगा मस्तके
English explanation
He in whose lap shines Parvati, the mountain king’s daughter, and on whose head shines Ganga, the celestial river—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| यस्याङ्के | जिनकी गोद में | in whose lap |
| च | और | and |
| विभाति | शोभित होती हैं | shines |
| भूधरसुता | पर्वतराज हिमालय की पुत्री पार्वती | Parvati, daughter of the mountain king Himalaya |
| देवापगा | देवसरिता गंगा | Ganga, the celestial river |
| मस्तके | मस्तक पर | on the head |
2भाले बालविधुर्गले च गरलं यस्योरसि व्यालराट्।
English explanation
On whose forehead is the young moon, in whose throat is poison, and on whose chest is the serpent king—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भाले | ललाट पर | on the forehead |
| बालविधुर्गले | नवीन चंद्रमा; गले में | the young moon; in the throat |
| च | और | and |
| गरलं | विष | poison |
| यस्योरसि | जिनके वक्ष पर | on whose chest |
| व्यालराट् | सर्पराज | the serpent king |
3सोऽयं भूतिविभूषणः सुरवरः सर्वाधिपः सर्वदा
English explanation
May that very one, adorned with sacred ash, foremost among the gods and lord of all, always—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सोऽयं | वे ही ये | that very one |
| भूतिविभूषणः | भस्म को आभूषण बनाने वाले | adorned with sacred ash |
| सुरवरः | देवों में श्रेष्ठ | foremost among the gods |
| सर्वाधिपः | सबके अधिपति | lord of all |
| सर्वदा | सदा | always |
4शर्वः सर्वगतः शिवः शशिनिभः श्रीशङ्करः पातु माम्॥१॥
English explanation
May Lord Shankara—Sharva, all-pervading, auspicious, and radiant like the moon—always protect me.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| शर्वः | शर्व, शिव का एक नाम | Sharva, a name of Shiva |
| सर्वगतः | सर्वव्यापी | all-pervading |
| शिवः | शिव, कल्याणस्वरूप | Shiva, the auspicious one |
| शशिनिभः | चंद्रमा के समान उज्ज्वल | radiant like the moon |
| श्रीशङ्करः | श्री शंकर, कल्याण करने वाले शिव | Lord Shankara, Shiva who brings well-being |
| पातु | रक्षा करें | may he protect |
| माम् | मुझे | me |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- श्लोक
- स्रोत अभिलेख
- मंगलाचरण
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 343
- सहायक विषय
- मंगलाचरण
- मुद्रित पृष्ठ
- 343, 343
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।