बालकाण्ड · श्लोक · श्लोक
वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि।
मूल पाठ
वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि।
मङ्गलानां च कर्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥१॥
स्रोत अभिलेख मंगलाचरण · पुस्तक पृ. 17, 19
भावार्थ
मूल पाठ के बादअक्षरों, अर्थसमूहों, रसों, छन्दों और मंगलोंकी करनेवाली सरस्वतीजी और गणेशजीकी मैं वन्दना करता हूँ॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 17 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि।
English explanation
Of letters, collections of meanings, poetic sentiments, and metres too—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| वर्णानामर्थसंघानां | अक्षरों और अर्थसमूहों के | of letters and collections of meanings |
| रसानां | काव्य-रसों के | of poetic sentiments |
| छन्दसामपि | छंदों के भी | of metres too |
2मङ्गलानां च कर्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥१॥
English explanation
I bow to Saraswati and Ganesha, the two makers of these and of auspiciousness.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मङ्गलानां | मंगलों के | of auspicious things |
| च | और | and |
| कर्तारौ | दोनों रचयिताओं को | to the two creators |
| वन्दे | मैं प्रणाम करता हूँ | I bow to |
| वाणीविनायकौ | सरस्वती और गणेश को | to Saraswati and Ganesha |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- श्लोक
- स्रोत अभिलेख
- मंगलाचरण
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 17
- सहायक विषय
- मंगलाचरण
- मुद्रित पृष्ठ
- 17, 19
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