बालकाण्ड · श्लोक · श्लोक
भवानीशङ्करौ वन्दे श्रद्धाविश्वासरूपिणौ।
मूल पाठ
भवानीशङ्करौ वन्दे श्रद्धाविश्वासरूपिणौ।
याभ्यां विना न पश्यन्ति सिद्धाः स्वान्तःस्थमीश्वरम्॥२॥
स्रोत अभिलेख मंगलाचरण · पुस्तक पृ. 17, 19
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रद्धा और विश्वासके स्वरूप श्रीपार्वतीजी और श्रीशङ्करजीकी मैं वन्दना करता हूँ, जिनके बिना सिद्धजन अपने अन्त:करणमें स्थित ईश्वरको नहीं देख सकते॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 17 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1भवानीशङ्करौ वन्दे श्रद्धाविश्वासरूपिणौ।
English explanation
I bow to Bhavani and Shankara, embodiments of reverence and trust.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भवानीशङ्करौ | पार्वती और शिव को | to Parvati and Shiva |
| वन्दे | मैं प्रणाम करता हूँ | I bow to |
| श्रद्धाविश्वासरूपिणौ | श्रद्धा और विश्वास के स्वरूप दोनों को | to the two embodying reverence and trust |
2याभ्यां विना न पश्यन्ति सिद्धाः स्वान्तःस्थमीश्वरम्॥२॥
English explanation
Without these two, even perfected adepts do not perceive God dwelling within their own hearts.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| याभ्यां | जिन दोनों के | these two, without whom |
| विना | बिना | without |
| न | नहीं | not |
| पश्यन्ति | देखते हैं | perceive |
| सिद्धाः | सिद्ध साधक | perfected adepts |
| स्वान्तःस्थमीश्वरम् | अपने अंतःकरण में स्थित ईश्वर को | God dwelling within their own hearts |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- श्लोक
- स्रोत अभिलेख
- मंगलाचरण
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 17
- सहायक विषय
- मंगलाचरण
- मुद्रित पृष्ठ
- 17, 19
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