लङ्काकाण्ड · श्लोक · श्लोक
रामं कामारिसेव्यं भवभयहरणं कालमत्तेभसिंहं
मूल पाठ
रामं कामारिसेव्यं भवभयहरणं कालमत्तेभसिंहं
योगीन्द्रं ज्ञानगम्यं गुणनिधिमजितं निर्गुणं निर्विकारम्।
मायातीतं सुरेशं खलवधनिरतं ब्रह्मवृन्दैकदेवं
वन्दे कन्दावदातं सरसिजनयनं देवमुर्वीशरूपम्॥१॥
स्रोत अभिलेख मंगलाचरण · पुस्तक पृ. 771, 772
भावार्थ
मूल पाठ के बादकामदेवके शत्रु शिवजीके सेव्य, भव (जन्म-मृत्यु) के भयको हरनेवाले, कालरूपी मतवाले हाथीके लिये सिंहके समान, योगियोंके स्वामी (योगीश्वर), ज्ञानके द्वारा जानने योग्य, गुणोंकी निधि, अजेय, निर्गुण, निॢवकार, मायासे परे, देवताओंके स्वामी, दुष्टोंके वधमें तत्पर, ब्राह्मणवृन्दके एकमात्र देवता (रक्षक), जलवाले मेघके समान सुन्दर श्याम, कमलके-से नेत्रवाले, पृथ्वीपति (राजा) के रूपमें परमदेव श्रीरामजीकी मैं वन्दना करता हूँ॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 771 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1रामं कामारिसेव्यं भवभयहरणं कालमत्तेभसिंहं
English explanation
I bow to Rama, served by Shiva, the foe of Desire, who removes the fear of worldly existence and is a lion to the maddened elephant of Time.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रामं | राम को | to Rama |
| कामारिसेव्यं | कामदेव के शत्रु शिव द्वारा सेवित | served by Shiva, the enemy of the god of desire |
| भवभयहरणं | संसारजनित भय हरने वाले | remover of the fear of worldly existence |
| कालमत्तेभसिंहं | कालरूपी मदमस्त हाथी के लिए सिंह | a lion to the maddened elephant of Time |
2योगीन्द्रं ज्ञानगम्यं गुणनिधिमजितं निर्गुणं निर्विकारम्।
English explanation
He is the lord of yogis, knowable through knowledge, a treasury of virtues, unconquered, beyond the qualities of nature, and changeless.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| योगीन्द्रं | योगियों के अधिपति | lord of yogis |
| ज्ञानगम्यं | ज्ञान द्वारा जानने योग्य | accessible through knowledge |
| गुणनिधिमजितं | गुणों के भंडार और अजेय | a treasury of virtues and unconquered |
| निर्गुणं | प्रकृति के गुणों से परे | beyond the qualities of nature |
| निर्विकारम् | विकार या परिवर्तन से रहित | free from alteration or change |
3मायातीतं सुरेशं खलवधनिरतं ब्रह्मवृन्दैकदेवं
English explanation
He is beyond illusion, lord of the gods, intent on slaying the wicked, and the sole worshipful deity of the community of Brahmins.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मायातीतं | माया से परे | beyond illusion |
| सुरेशं | देवताओं के स्वामी | lord of the gods |
| खलवधनिरतं | दुष्टों के वध में तत्पर | intent on slaying the wicked |
| ब्रह्मवृन्दैकदेवं | ब्राह्मण-समुदाय के एकमात्र आराध्य देव | the sole worshipful deity of the community of Brahmins |
4वन्दे कन्दावदातं सरसिजनयनं देवमुर्वीशरूपम्॥१॥
English explanation
I bow to the lotus-eyed divine Rama in the form of a king; the supplied reading ‘कन्दावदातं’, describing his brightness, is uncertain.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| वन्दे | मैं वंदन करता हूँ | I bow to |
| कन्दावदातं | जलभरे मेघ के समान सुंदर श्यामवर्ण वाले | beautiful and dark like a rain-filled cloud |
| सरसिजनयनं | कमल जैसे नेत्रों वाले | lotus-eyed |
| देवमुर्वीशरूपम् | राजा के रूप वाले देव को | to the divine one in the form of a king |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- श्लोक
- स्रोत अभिलेख
- मंगलाचरण
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 771
- सहायक विषय
- मंगलाचरण
- मुद्रित पृष्ठ
- 771, 772
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।