लङ्काकाण्ड · श्लोक · श्लोक
शङ्खेन्द्वाभमतीवसुन्दरतनुं शार्दूलचर्माम्बरं
मूल पाठ
शङ्खेन्द्वाभमतीवसुन्दरतनुं शार्दूलचर्माम्बरं
कालव्यालकरालभूषणधरं गङ्गाशशाङ्कप्रियम्।
काशीशं कलिकल्मषौघशमनं कल्याणकल्पद्रुमं
नौमीड्यं गिरिजापतिं गुणनिधिं कन्दर्पहं शङ्करम्॥२॥
स्रोत अभिलेख मंगलाचरण · पुस्तक पृ. 771, 772
भावार्थ
मूल पाठ के बादशङ्ख और चन्द्रमाकी-सी कान्तिके अत्यन्त सुन्दर शरीरवाले, व्याघ्रचर्मके वस्त्रवाले, कालके समान [अथवा काले रंगके] भयानक सर्पोंका भूषण धारण करनेवाले, गङ्गा और चन्द्रमाके प्रेमी, काशीपति, कलियुगके पाप-समूहका नाश करनेवाले, कल्याणके कल्पवृक्ष, गुणोंके निधान और कामदेवको भस्म करनेवाले पार्वतीपति वन्दनीय श्रीशङ्करजीको मैं नमस्कार करता हूँ॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 771 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1शङ्खेन्द्वाभमतीवसुन्दरतनुं शार्दूलचर्माम्बरं
English explanation
I bow to Shiva, whose exceedingly beautiful body shines like a conch and the moon, and whose garment is a tiger skin.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| शङ्खेन्द्वाभमतीवसुन्दरतनुं | शंख और चंद्रमा जैसी उज्ज्वल, अत्यंत सुंदर देह वाले | having an exceedingly beautiful body radiant like a conch and the moon |
| शार्दूलचर्माम्बरं | बाघ की खाल को वस्त्र रूप में पहनने वाले | wearing a tiger skin as a garment |
2कालव्यालकरालभूषणधरं गङ्गाशशाङ्कप्रियम्।
English explanation
He wears a fearsome black serpent as an ornament, and holds the Ganges and the moon dear.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कालव्यालकरालभूषणधरं | भयंकर काले सर्प का आभूषण धारण करने वाले | wearer of a fearsome black serpent as an ornament |
| गङ्गाशशाङ्कप्रियम् | गंगा और चंद्रमा को प्रिय मानने वाले | holding the Ganges and the moon dear |
3काशीशं कलिकल्मषौघशमनं कल्याणकल्पद्रुमं
English explanation
He is the lord of Kashi, the dispeller of the multitude of sins of the Kali age, and a wish-fulfilling tree of well-being.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| काशीशं | काशी के स्वामी | lord of Kashi |
| कलिकल्मषौघशमनं | कलियुग के पापों के समूह का शमन करने वाले | dispeller of the multitude of sins of the Kali age |
| कल्याणकल्पद्रुमं | कल्याण देने वाले कल्पवृक्ष | a wish-fulfilling tree bestowing well-being |
4नौमीड्यं गिरिजापतिं गुणनिधिं कन्दर्पहं शङ्करम्॥२॥
English explanation
I bow to the praiseworthy Shankara, husband of Parvati, treasury of virtues, and destroyer of the god of desire.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नौमीड्यं | मैं स्तुति के योग्य को प्रणाम करता हूँ | I bow to the praiseworthy one |
| गिरिजापतिं | गिरिजा अर्थात पार्वती के पति को | to the husband of Parvati, daughter of the mountain |
| गुणनिधिं | गुणों के भंडार को | to the treasury of virtues |
| कन्दर्पहं | कामदेव का नाश करने वाले को | to the destroyer of the god of desire |
| शङ्करम् | शंकर अर्थात शिव को | to Shankara, Shiva |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- श्लोक
- स्रोत अभिलेख
- मंगलाचरण
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 771
- सहायक विषय
- मंगलाचरण
- मुद्रित पृष्ठ
- 771, 772
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।