लङ्काकाण्ड · श्लोक · श्लोक
यो ददाति सतां शम्भुः कैवल्यमपि दुर्लभम्।
मूल पाठ
यो ददाति सतां शम्भुः कैवल्यमपि दुर्लभम्।
खलानां दण्डकृद्योऽसौ शङ्करः शं तनोतु मे॥३॥
स्रोत अभिलेख मंगलाचरण · पुस्तक पृ. 771, 772
भावार्थ
मूल पाठ के बादजो सत्पुरुषोंको अत्यन्त दुर्लभ कैवल्यमुक्तितक दे डालते हैं और जो दुष्टोंको दण्ड देनेवाले हैं, वे कल्याणकारी श्रीशम्भु मेरे कल्याणका विस्तार करें॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 772 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1यो ददाति सतां शम्भुः कैवल्यमपि दुर्लभम्।
English explanation
Shambhu, who grants the virtuous even the rare liberation of kaivalya—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| यो | जो | who |
| ददाति | देते हैं | grants |
| सतां | सज्जनों को | to the virtuous |
| शम्भुः | शंभु अर्थात शिव | Shambhu, Shiva |
| कैवल्यमपि | कैवल्य-मुक्ति भी | even liberation into absolute freedom |
| दुर्लभम् | दुर्लभ | rare; difficult to attain |
2खलानां दण्डकृद्योऽसौ शङ्करः शं तनोतु मे॥३॥
English explanation
And who punishes the wicked—may that Shankara bring me well-being.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| खलानां | दुष्टों का; दुष्टों को | of the wicked; upon the wicked |
| दण्डकृद्योऽसौ | दंड देने वाले जो हैं, वे | that one who administers punishment |
| शङ्करः | शंकर अर्थात शिव | Shankara, Shiva |
| शं | कल्याण | well-being |
| तनोतु | प्रदान करें; बढ़ाएँ | may he bestow; may he extend |
| मे | मेरे लिए; मेरा | for me; my |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- श्लोक
- स्रोत अभिलेख
- मंगलाचरण
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 772
- सहायक विषय
- मंगलाचरण
- मुद्रित पृष्ठ
- 771, 772
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