किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · पृष्ठ 4

किष्किन्धाकाण्ड की चौपाइयाँ — पृष्ठ 4

154 पद · इस पृष्ठ पर 151–154 · हर पद का मूल पाठ, PDF भावार्थ और शब्दार्थ अलग पृष्ठ पर।

  1. 151 चौपाईकवन सो काज कठिन जग
  2. 152 चौपाईकनक बरन तन तेज बिराजा
  3. 153 चौपाईसहित सहाय रावनहि मारी आनउँ
  4. 154 चौपाईएतना करहु तात तुम्ह जाई