किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सहित सहाय रावनहि मारी। आनउँ इहाँ त्रिकूट उपारी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दऔर सहायकोंसहित रावणको मारकर त्रिकूट पर्वतको उखाड़कर यहाँ ला सकता हूँ। हे जाम्बवान्! मैं तुमसे पूछता हूँ, तुम मुझे उचित सीख देना [कि मुझे क्या करना चाहिये]॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 710 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सहित सहाय रावनहि मारी। आनउँ इहाँ त्रिकूट उपारी।।
जामवंत मैं पूँछउँ तोही। उचित सिखावनु दीजहु मोही।।
स्रोत अभिलेख 4.3 · पुस्तक पृ. 710, 711
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सहित सहाय रावनहि मारी। आनउँ इहाँ त्रिकूट उपारी।।
English explanation
‘I can kill Ravana along with his helpers, uproot Mount Trikuta, and bring it here.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सहित | समेत | together with |
| सहाय | सहायक | helpers |
| रावनहि | राक्षसराज रावण को | Ravana, the demon-king |
| मारी | मारकर | having killed |
| आनउँ | ले आऊँ | I shall bring |
| इहाँ | यहाँ | here |
| त्रिकूट | लंका का त्रिकूट पर्वत | Mount Trikuta of Lanka |
| उपारी | उखाड़कर | having uprooted |
2 जामवंत मैं पूँछउँ तोही। उचित सिखावनु दीजहु मोही।।
English explanation
‘Jambavan, I ask you: please give me appropriate guidance.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जामवंत | हे जामवंत | O Jambavan |
| मैं | मैं | I |
| पूँछउँ | पूछता हूँ | ask |
| तोही | आपसे | you |
| उचित | उचित | appropriate |
| सिखावनु | सलाह; मार्गदर्शन | advice; guidance |
| दीजहु | दीजिए | please give |
| मोही | मुझे | to me |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.3
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 710
- सहायक विषय
- समुद्र लाँघनेका परामर्श, जाम्बवन्तका हनुमान्जीको बल याद दिलाकर उत्साहित करना · श्रीरामगुणका माहात्म्य
- मुद्रित पृष्ठ
- 710, 711
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।