किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कवन सो काज कठिन जग माहीं। जो नहिं होइ तात तुम्ह पाहीं।।
मूल पाठ
कवन सो काज कठिन जग माहीं। जो नहिं होइ तात तुम्ह पाहीं।।
राम काज लगि तब अवतारा। सुनतहिं भयउ पर्वताकारा।।
स्रोत अभिलेख 4.3 · पुस्तक पृ. 710, 711
भावार्थ
मूल पाठ के बादजगत्में कौन-सा ऐसा कठिन काम है जो हे तात! तुमसे न हो सके। श्रीरामजीके कार्यके लिये ही तो तुम्हारा अवतार हुआ है। यह सुनते ही हनुमान्जी पर्वतके आकारके (अत्यन्त विशालकाय) हो गये॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 710 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 कवन सो काज कठिन जग माहीं। जो नहिं होइ तात तुम्ह पाहीं।।
English explanation
Dear one, what difficult task in the world is there that you cannot accomplish?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कवन | कौन-सा | which |
| सो | ऐसा | such |
| काज | कार्य | task |
| कठिन | कठिन | difficult |
| जग | संसार | the world |
| माहीं | में | in |
| जो | जो | that |
| नहिं | नहीं | not |
| होइ | हो सके | can be accomplished |
| तात | हे प्रिय | dear one |
| तुम्ह | तुम | you |
| पाहीं | से; तुम्हारे द्वारा | by; through your ability |
2 राम काज लगि तब अवतारा। सुनतहिं भयउ पर्वताकारा।।
English explanation
You were born for Rama’s work—the contextual sense, though the supplied text reads ‘then.’ On hearing this, Hanuman became mountain-sized.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | भगवान राम | Rama |
| काज | कार्य | work |
| लगि | के लिए | for |
| तब | तब | then |
| अवतारा | जन्म; अवतरण | birth; advent |
| सुनतहिं | सुनते ही | immediately upon hearing |
| भयउ | हो गए | became |
| पर्वताकारा | पर्वत के आकार वाले | mountain-sized |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.3
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 710
- सहायक विषय
- समुद्र लाँघनेका परामर्श, जाम्बवन्तका हनुमान्जीको बल याद दिलाकर उत्साहित करना · श्रीरामगुणका माहात्म्य
- मुद्रित पृष्ठ
- 710, 711
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।