किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कहइ रीछपति सुनु हनुमाना। का चुप साधि रहेहु बलवाना।।
मूल पाठ
कहइ रीछपति सुनु हनुमाना। का चुप साधि रहेहु बलवाना।।
पवन तनय बल पवन समाना। बुधि बिबेक बिग्यान निधाना।।
स्रोत अभिलेख 4.3 · पुस्तक पृ. 710, 711
भावार्थ
मूल पाठ के बादऋक्षराज जाम्बवान्ने श्रीहनुमान्जीसे कहा—हे हनुमान्! हे बलवान्! सुनो, तुमने यह क्या चुप साध रखी है? तुम पवनके पुत्र हो और बलमें पवनके समान हो। तुम बुद्धि-विवेक और विज्ञानकी खान हो॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 710 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 कहइ रीछपति सुनु हनुमाना। का चुप साधि रहेहु बलवाना।।
English explanation
The bear-chief says, ‘Listen, Hanuman! Mighty one, why are you keeping silent?’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहइ | कहते हैं | says |
| रीछपति | रीछों के स्वामी जामवंत | Jambavan, chief of the bears |
| सुनु | सुनो | listen |
| हनुमाना | हे हनुमान | O Hanuman |
| का | क्यों | why |
| चुप | चुप्पी | silence |
| साधि | धारण करके | maintaining |
| रहेहु | रहे हो | are remaining |
| बलवाना | हे बलवान | O mighty one |
2 पवन तनय बल पवन समाना। बुधि बिबेक बिग्यान निधाना।।
English explanation
Son of the wind-god, your strength equals the wind’s; you are a treasury of intelligence, discernment, and deep knowledge.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पवन | पवनदेव | the wind-god |
| तनय | पुत्र | son |
| बल | बल | strength |
| पवन | पवन के | the wind’s |
| समाना | समान | equal to |
| बुधि | बुद्धि | intelligence |
| बिबेक | विवेक | discernment |
| बिग्यान | विशिष्ट ज्ञान | deep knowledge |
| निधाना | भंडार | treasury |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.3
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 710
- सहायक विषय
- समुद्र लाँघनेका परामर्श, जाम्बवन्तका हनुमान्जीको बल याद दिलाकर उत्साहित करना · श्रीरामगुणका माहात्म्य
- मुद्रित पृष्ठ
- 710, 711
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।