उत्तरकाण्ड · सोरठा 92 (क) · सोरठा
रामु अमित गुन सागर थाह कि पावइ कोइ।
मूल पाठ
रामु अमित गुन सागर थाह कि पावइ कोइ।
संतन्ह सन जस किछु सुनेउँ तुम्हहि सुनायउँ सोइ॥ ९२ (क)॥
स्रोत अभिलेख 7.92 · पुस्तक पृ. 994, 994
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रीरामजी अपार गुणोंके समुद्र हैं, क्या उनकी कोई थाह पा सकता है? संतोंसे मैंने जैसा कुछ सुना था, वही आपको सुनाया॥ ९२ (क)॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 995 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1रामु अमित गुन सागर थाह कि पावइ कोइ।
English explanation
Rama is an ocean of boundless virtues; can anyone fathom him?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रामु | भगवान राम | Lord Rama |
| अमित | असीम | boundless |
| गुन | गुणों के | of virtues |
| सागर | समुद्र | ocean |
| थाह | गहराई; पूरा मर्म | depth; full extent |
| कि | क्या | can; whether |
| पावइ | पा सकता है | can fathom |
| कोइ | कोई | anyone |
2संतन्ह सन जस किछु सुनेउँ तुम्हहि सुनायउँ सोइ॥ ९२ (क)॥
English explanation
Whatever I heard from the saints, just as I heard it, I have related to you.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| संतन्ह | संतों | the saints |
| सन | से | from |
| जस | जैसा | as; in the manner that |
| किछु | कुछ; जो कुछ | whatever |
| सुनेउँ | मैंने सुना | I heard |
| तुम्हहि | तुम्हें | to you |
| सुनायउँ | मैंने सुनाया | I related |
| सोइ | वही | that very thing |
| क | पद-संदर्भ चिह्न ‘क’ | verse reference marker “क” |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- सोरठा 92 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 7.92
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 995
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 994, 994
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।