उत्तरकाण्ड · सोरठा 92 (ख) · सोरठा
भाव बस्य भगवान सुख निधान करुना भवन।
भाव बस्य भगवान सुख निधान करुना भवन।
तजि ममता मद मान भजिअ सदा सीता रवन॥ ९२ (ख)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.92 · पुस्तक पृ. 994, 994
भावार्थ और शब्दार्थ
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1भाव बस्य भगवान सुख निधान करुना भवन।
भगवान भक्तिभाव के वश में हैं, सुख के भंडार और करुणा के धाम हैं।
English explanation
The Lord is won over by devotional feeling; he is the treasure of happiness and the abode of compassion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भाव | भक्तिभाव के | by devotional feeling |
| बस्य | वश में; वशीभूत | won over; responsive |
| भगवान | भगवान राम | the Lord, Rama |
| सुख | आनंद का | of happiness |
| निधान | भंडार | treasure; repository |
| करुना | करुणा का | of compassion |
| भवन | धाम; निवास | abode |
2 तजि ममता मद मान भजिअ सदा सीता रवन॥ ९२ (ख)॥
ममता, मद और अभिमान छोड़कर सदा सीता के पति राम का भजन करना चाहिए।
English explanation
Giving up possessive attachment, arrogance, and pride, one should always worship Rama, Sita’s husband.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तजि | छोड़कर | having abandoned |
| ममता | अपनापनजनित आसक्ति | possessive attachment |
| मद | मद; अहंकार का नशा | arrogance; intoxication with self |
| मान | अभिमान | pride |
| भजिअ | भजन करना चाहिए | one should worship |
| सदा | सदैव | always |
| सीता | सीता के | of Sita |
| रवन | पति; राम | husband; Rama |
| ख | पद-संदर्भ चिह्न ‘ख’ | verse reference marker “ख” |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- सोरठा 92 (ख)
- स्रोत अभिलेख
- 7.92
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 994, 994
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