उत्तरकाण्ड · दोहा 93 (क) · दोहा
ताहि प्रसंसि बिबिधि बिधि सीस नाइ कर जोरि।
ताहि प्रसंसि बिबिधि बिधि सीस नाइ कर जोरि।
बचन बिनीत सप्रेम मृदु बोलेउ गरुड़ बहोरि॥ ९३ (क)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.93 · पुस्तक पृ. 995, 995
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1ताहि प्रसंसि बिबिधि बिधि सीस नाइ कर जोरि।
एआई-प्रारूप: उनकी अनेक प्रकार से प्रशंसा करके, सिर झुकाकर और हाथ जोड़कर—
English explanation
AI draft: Having praised him in various ways, bowed his head, and joined his hands—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ताहि | उनकी; यहाँ काकभुशुण्डि की | him; here, Kakabhushundi |
| प्रसंसि | प्रशंसा करके | having praised |
| बिबिधि | विविध; अनेक प्रकार की | various; manifold |
| बिधि | रीति से; प्रकार से | in ways; by methods |
| सीस | सिर | head |
| नाइ | झुकाकर | having bowed |
| कर | हाथ | hands |
| जोरि | जोड़कर | having joined together |
2बचन बिनीत सप्रेम मृदु बोलेउ गरुड़ बहोरि॥ ९३ (क)॥
एआई-प्रारूप: गरुड़ फिर विनम्र, प्रेमपूर्ण और कोमल वचन बोले।
English explanation
AI draft: Garuda then spoke again in humble, loving, gentle words.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बचन | वचन; बातें | words |
| बिनीत | विनम्र | humble |
| सप्रेम | प्रेम से भरे | loving; filled with affection |
| मृदु | कोमल; मधुर | gentle; tender |
| बोलेउ | बोले | spoke |
| गरुड़ | गरुड़, विष्णु के पक्षीराज वाहन | Garuda, the bird-king and Vishnu’s mount |
| बहोरि | फिर; पुनः | again |
| क | दोहा ९३ के पहले भाग का संदर्भ-चिह्न | reference marker for the first part of verse 93 |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 93 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 7.93
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 995, 995
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।