उत्तरकाण्ड · दोहा 93 (ख) · दोहा
प्रभु अपने अबिबेक ते बूझउँ स्वामी तोहि।
प्रभु अपने अबिबेक ते बूझउँ स्वामी तोहि।
कृपासिंधु सादर कहहु जानि दास निज मोहि॥ ९३ (ख)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.93 · पुस्तक पृ. 995, 995
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1प्रभु अपने अबिबेक ते बूझउँ स्वामी तोहि।
एआई-प्रारूप: हे प्रभु, हे स्वामी! अपने विवेक के अभाव के कारण मैं आपसे पूछता हूँ।
English explanation
AI draft: O lord, O master, because of my own lack of discernment, I ask you.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रभु | हे प्रभु; काकभुशुण्डि के लिए सम्मानपूर्ण संबोधन | O lord; a respectful address to Kakabhushundi |
| अपने | अपने; स्वयं के | my own |
| अबिबेक | विवेक का अभाव; अज्ञान | lack of discernment; ignorance |
| ते | से; के कारण | because of; owing to |
| बूझउँ | मैं पूछता हूँ | I ask |
| स्वामी | हे स्वामी | O master |
| तोहि | आपसे | you; of you |
2कृपासिंधु सादर कहहु जानि दास निज मोहि॥ ९३ (ख)॥
एआई-प्रारूप: हे कृपा के सागर! मुझे अपना दास समझकर कृपया आदरपूर्वक बताइए।
English explanation
AI draft: O ocean of compassion, regard me as your own servant and kindly explain with consideration.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कृपासिंधु | हे कृपा के सागर | O ocean of compassion |
| सादर | आदर सहित; सम्मानपूर्वक | with respect; considerately |
| कहहु | कहिए; बताइए | please tell; explain |
| जानि | जानकर; समझकर | regarding; recognizing as |
| दास | दास; सेवक | servant |
| निज | अपना | your own |
| मोहि | मुझे | me |
| ख | दोहा ९३ के दूसरे भाग का संदर्भ-चिह्न | reference marker for the second part of verse 93 |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 93 (ख)
- स्रोत अभिलेख
- 7.93
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 995, 995
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।