उत्तरकाण्ड · छंद · छंद
निरुपम न उपमा आन राम समान रामु निगम कहै।
मूल पाठ
निरुपम न उपमा आन राम समान रामु निगम कहै।
जिमि कोटि सत खद्योत सम रबि कहत अति लघुता लहै॥
एहि भाँति निज निज मति बिलास मुनीस हरिहि बखानहीं।
प्रभु भाव गाहक अति कृपाल सप्रेम सुनि सुख मानहीं॥
स्रोत अभिलेख 7.92 · पुस्तक पृ. 994, 994
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रीरामजी उपमारहित हैं, उनकी कोई दूसरी उपमा है ही नहीं। श्रीरामके समान श्रीराम ही हैं, ऐसा वेद कहते हैं। जैसे अरबों जुगनुओंके समान कहनेसे सूर्य [प्रशंसाको नहीं वरं] अत्यन्त लघुताको ही प्राप्त होता है (सूर्यकी निन्दा ही होती है)। इसी प्रकार अपनी-अपनी बुद्धिके विकासके अनुसार मुनीश्वर श्रीहरिका वर्णन करते हैं। किन्तु प्रभु भक्तोंके भावमात्रको ग्रहण करनेवाले और अत्यन्त कृपालु हैं। वे उस वर्णनको प्रेमसहित सुनकर सुख मानते हैं।
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 994 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1निरुपम न उपमा आन राम समान रामु निगम कहै।
English explanation
AI-generated meaning draft: Rama is incomparable; there is no other comparison for him. The Vedas say that Rama alone is equal to Rama.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निरुपम | अनुपम; जिनकी तुलना नहीं | incomparable |
| न | नहीं | not |
| उपमा | तुलना | comparison |
| आन | अन्य; दूसरी | other |
| राम | भगवान राम के | to Lord Rama |
| समान | बराबर | equal |
| रामु | राम ही | Rama alone |
| निगम | वेद | the Vedas |
| कहै | कहते हैं | declare |
2जिमि कोटि सत खद्योत सम रबि कहत अति लघुता लहै॥
English explanation
Just as comparing the sun to a hundred crore fireflies greatly diminishes its stature.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जिमि | जैसे | just as |
| कोटि | करोड़ | crore; ten million |
| सत | सौ | hundred |
| खद्योत | जुगनू | fireflies |
| सम | समान | equal to |
| रबि | सूर्य | the sun |
| कहत | कहने पर | when described as |
| अति | अत्यंत | extreme |
| लघुता | तुच्छता; महिमा का घट जाना | diminishment of stature |
| लहै | पाता है | undergoes |
3एहि भाँति निज निज मति बिलास मुनीस हरिहि बखानहीं।
English explanation
In this way, the great sages describe Hari according to the individual expression of their understanding.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एहि | इस | this |
| भाँति | प्रकार | way |
| निज | अपनी | their own |
| निज | अपनी; प्रत्येक की अलग | each one's own |
| मति | बुद्धि | understanding |
| बिलास | अभिव्यक्ति; विस्तार | expression; unfolding |
| मुनीस | श्रेष्ठ मुनि | great sages |
| हरिहि | हरि का; यहाँ राम का | Hari, here Rama |
| बखानहीं | वर्णन करते हैं | describe and praise |
4प्रभु भाव गाहक अति कृपाल सप्रेम सुनि सुख मानहीं॥
English explanation
The Lord receives the devotional feeling and is exceedingly gracious; he listens lovingly and takes delight.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रभु | भगवान राम | the Lord, Rama |
| भाव | भक्तिभाव | devotional feeling |
| गाहक | ग्रहण करने वाले | one who receives and values |
| अति | अत्यंत | exceedingly |
| कृपाल | कृपालु | gracious |
| सप्रेम | प्रेमपूर्वक | lovingly |
| सुनि | सुनकर | having listened |
| सुख | आनंद | delight |
| मानहीं | अनुभव करते हैं | take; experience |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 7.92
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 994
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 994, 994
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।