उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
धनद कोटि सत सम धनवाना। माया कोटि प्रपंच निधाना।।
मूल पाठ
धनद कोटि सत सम धनवाना। माया कोटि प्रपंच निधाना।।
भार धरन सत कोटि अहीसा। निरवधि निरुपम प्रभु जगदीसा।।
स्रोत अभिलेख 7.92 · पुस्तक पृ. 994, 994
भावार्थ
मूल पाठ के बादवे अरबों कुबेरोंके समान धनवान् और करोड़ों मायाओंके समान सृष्टिके खजाने हैं। बोझ उठानेमें वे अरबों शेषोंके समान हैं। [अधिक क्या] जगदीश्वर प्रभु श्रीरामजी [सभी बातोंमें] सीमारहित और उपमारहित हैं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 994 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1धनद कोटि सत सम धनवाना। माया कोटि प्रपंच निधाना।।
English explanation
The Lord is as wealthy as a billion Kuberas and is the repository of the manifold manifestations of ten million powers of illusion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| धनद | धन के देवता कुबेर | Kubera, god of wealth |
| कोटि | करोड़ | ten million |
| सत | सौ | one hundred |
| सम | के समान | like; equal to |
| धनवाना | धन-संपन्न | wealthy |
| माया | माया; जगत प्रकट करने वाली शक्ति | illusion; world-manifesting power |
| कोटि | करोड़ | ten million |
| प्रपंच | जगत का विविध विस्तार | the manifold display of the world |
| निधाना | भंडार; आश्रय | repository; source |
2 भार धरन सत कोटि अहीसा। निरवधि निरुपम प्रभु जगदीसा।।
English explanation
In bearing the world’s weight, the Lord is like a billion Sheshas. The Lord of the universe is boundless and incomparable.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भार | जगत का भार | the world’s weight |
| धरन | धारण करना; सँभालना | bearing; supporting |
| सत | सौ | one hundred |
| कोटि | करोड़ | ten million |
| अहीसा | सर्पराज शेषनाग | Shesha, king of serpents |
| निरवधि | सीमारहित; असीम | boundless; unlimited |
| निरुपम | जिसकी कोई उपमा नहीं | incomparable |
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| जगदीसा | जगत के स्वामी | Lord of the universe |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.92
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 994
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 994, 994
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।