उत्तरकाण्ड · सोरठा 87 (क) · सोरठा
पुरुष नपुंसक नारि वा जीव चराचर कोइ।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दवह पुरुष हो, नपुंसक हो, स्त्री हो अथवा चर-अचर कोई भी जीव हो, कपट छोड़कर जो भी सर्वभावसे मुझे भजता है वही मुझे परम प्रिय है॥ ८७ (क)॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 989 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
पुरुष नपुंसक नारि वा जीव चराचर कोइ।
सर्ब भाव भज कपट तजि मोहि परम प्रिय सोइ॥ ८७ (क)॥
स्रोत अभिलेख 7.87 · पुस्तक पृ. 989, 989
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1पुरुष नपुंसक नारि वा जीव चराचर कोइ।
English explanation
AI-draft meaning: Whether male, of neither sex, or female—any living being, moving or stationary—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुरुष | पुरुष; नर | male; man |
| नपुंसक | नपुंसक; न नर न नारी | of neither male nor female sex |
| नारि | स्त्री; नारी | female; woman |
| वा | अथवा | or |
| जीव | जीव; प्राणी | living being |
| चराचर | चर और अचर; चलने वाले और स्थिर रहने वाले | moving and stationary beings |
| कोइ | कोई भी | any whatsoever |
2सर्ब भाव भज कपट तजि मोहि परम प्रिय सोइ॥ ८७ (क)॥
English explanation
Whoever abandons deceit and worships me wholeheartedly is supremely dear to me.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सर्ब | समस्त; पूरे | all; entire |
| भाव | मन के भाव से | with heartfelt devotion |
| भज | भक्ति करता है; भजता है | worships; devotes oneself |
| कपट | छल; दुराव | deceit; duplicity |
| तजि | छोड़कर | having abandoned |
| मोहि | मुझे; मुझको | me; to me |
| परम | अत्यंत; सर्वोच्च रूप से | supremely; exceedingly |
| प्रिय | प्रिय; प्यारा | dear; beloved |
| सोइ | वही जीव | that very being |
| क | दोहा ८७ के पहले भाग का संदर्भ-चिह्न | reference marker for the first part of verse 87 |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- सोरठा 87 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 7.87
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 989
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 989, 989
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।