उत्तरकाण्ड · श्लोक · श्लोक
विनिच्श्रितं वदामि ते न अन्यथा वचांसि मे।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दमैं आपसे भलीभाँति निश्चित किया हुआ सिद्धान्त कहता हूँ—मेरे वचन अन्यथा (मिथ्या) नहीं हैं कि जो मनुष्य श्रीहरिका भजन करते हैं, वे अत्यन्त दुस्तर संसारसागरको [सहज ही] पार कर जाते हैं॥ १२२ (ग)॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1038 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
विनिच्श्रितं वदामि ते न अन्यथा वचांसि मे।
हरिं नरा भजन्ति येऽतिदुस्तरं तरन्ति ते।।122(ग)।।
स्रोत अभिलेख 7.122 · पुस्तक पृ. 1036, 1038
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1विनिच्श्रितं वदामि ते न अन्यथा वचांसि मे।
English explanation
I tell you this with certainty; my words are not otherwise. The reading ‘विनिच्श्रितं’ is uncertain.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| विनिच्श्रितं | निश्चित रूप से | with certainty |
| वदामि | मैं कहता हूँ | I say |
| ते | तुमसे | to you |
| न | नहीं | not |
| अन्यथा | अन्यथा | otherwise |
| वचांसि | वचन | words |
| मे | मेरे | my |
2हरिं नरा भजन्ति येऽतिदुस्तरं तरन्ति ते।।122(ग)।।
English explanation
Those people who worship Hari cross the exceedingly difficult ocean of worldly existence.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हरिं | भगवान हरि को | Lord Hari |
| नरा | मनुष्य | people |
| भजन्ति | भजन करते हैं | worship |
| येऽतिदुस्तरं | जो; अत्यंत कठिनाई से पार होने वाले को | who; the exceedingly difficult-to-cross expanse |
| तरन्ति | पार करते हैं | cross |
| ते | वे | they |
| ग | पद-संदर्भ का चिह्न (ग) | verse reference marker (ग) |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- श्लोक
- स्रोत अभिलेख
- 7.122
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1038
- सहायक विषय
- भजन-महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 1036, 1038
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।