उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कहेउँ नाथ हरि चरित अनूपा। ब्यास समास स्वमति अनुरुपा।।
मूल पाठ
कहेउँ नाथ हरि चरित अनूपा। ब्यास समास स्वमति अनुरुपा।।
श्रुति सिद्धांत इहइ उरगारी। राम भजिअ सब काज बिसारी।।
स्रोत अभिलेख 7.123 · पुस्तक पृ. 1038, 1039
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे नाथ! मैंने श्रीहरिका अनुपम चरित्र अपनी बुद्धिके अनुसार कहीं विस्तारसे और कहीं संक्षेपसे कहा। हे सर्पोंके शत्रु गरुडज़ी! श्रुतियोंका यही सिद्धान्त है कि सब काम भुलाकर (छोड़कर) श्रीरामजीका भजन करना चाहिये॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1038 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1कहेउँ नाथ हरि चरित अनूपा। ब्यास समास स्वमति अनुरुपा।।
English explanation
AI-generated interpretive draft: O lord, I have narrated the incomparable deeds of Hari, sometimes at length and sometimes briefly, according to my understanding.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहेउँ | मैंने कहा या वर्णन किया | I have narrated |
| नाथ | हे नाथ | O lord |
| हरि | भगवान हरि, यहाँ राम | Lord Hari, here Rama |
| चरित | चरित्र और लीलाएँ | deeds and exploits |
| अनूपा | अनुपम | incomparable |
| ब्यास | विस्तार से | at length |
| समास | संक्षेप में | in brief |
| स्वमति | अपनी बुद्धि | my own understanding |
| अनुरुपा | के अनुरूप | in accordance with |
2 श्रुति सिद्धांत इहइ उरगारी। राम भजिअ सब काज बिसारी।।
English explanation
O Garuda, this is the conclusion of the Vedas: one should worship Rama, setting aside all other concerns.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| श्रुति | वेदों का | of the Vedas |
| सिद्धांत | निष्कर्ष | conclusion |
| इहइ | यही | this very thing |
| उरगारी | हे सर्पों के शत्रु गरुड़ | O Garuda, enemy of serpents |
| राम | भगवान राम का | Lord Rama |
| भजिअ | भजन करना चाहिए | one should worship |
| सब | सभी | all |
| काज | काम और चिंताएँ | tasks and concerns |
| बिसारी | भुलाकर | setting aside |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.123
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1038
- सहायक विषय
- रामायण-माहात्म्य, तुलसी-विनय और फलस्तुति
- मुद्रित पृष्ठ
- 1038, 1039
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।