उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
प्रभु रघुपति तजि सेइअ काही। मोहि से सठ पर ममता जाही।।
मूल पाठ
प्रभु रघुपति तजि सेइअ काही। मोहि से सठ पर ममता जाही।।
तुम्ह बिग्यानरूप नहिं मोहा। नाथ कीन्हि मो पर अति छोहा।।
स्रोत अभिलेख 7.123 · पुस्तक पृ. 1038, 1039
भावार्थ
मूल पाठ के बादप्रभु श्रीरघुनाथजीको छोड़कर और किसका सेवन (भजन) किया जाय, जिनका मुझ-जैसे मूर्खपर भी ममत्व (स्नेह) है। हे नाथ! आप विज्ञानरूप हैं, आपको मोह नहीं है। आपने तो मुझपर बड़ी कृपा की है॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1038 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 प्रभु रघुपति तजि सेइअ काही। मोहि से सठ पर ममता जाही।।
English explanation
Whom should one serve instead of Lord Rama, who has affection even for a fool like me?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रभु | स्वामी | the Lord |
| रघुपति | रघुकुल के स्वामी राम | Rama, lord of Raghu's line |
| तजि | छोड़कर | forsaking |
| सेइअ | सेवा करनी चाहिए | should one serve |
| काही | किसकी | whom |
| मोहि | मुझ | me |
| से | जैसे | like |
| सठ | मूर्ख | a fool |
| पर | पर | toward |
| ममता | स्नेह | affection |
| जाही | जिन्हें है | who has |
2 तुम्ह बिग्यानरूप नहिं मोहा। नाथ कीन्हि मो पर अति छोहा।।
English explanation
You embody realized knowledge and are free of delusion. O lord, you have shown me great affection and kindness.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुम्ह | आप | you |
| बिग्यानरूप | अनुभूत ज्ञान के स्वरूप | the embodiment of realized knowledge |
| नहिं | नहीं है | there is no |
| मोहा | मोह या भ्रम | delusion |
| नाथ | हे नाथ | O lord |
| कीन्हि | आपने की | you showed |
| मो | मुझ | me |
| पर | पर | toward |
| अति | बहुत | great |
| छोहा | स्नेह और कृपा | affection and kindness |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.123
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1038
- सहायक विषय
- रामायण-माहात्म्य, तुलसी-विनय और फलस्तुति
- मुद्रित पृष्ठ
- 1038, 1039
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।