उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पूछिहुँ राम कथा अति पावनि। सुक सनकादि संभु मन भावनि।।
मूल पाठ
पूछिहुँ राम कथा अति पावनि। सुक सनकादि संभु मन भावनि।।
सत संगति दुर्लभ संसारा। निमिष दंड भरि एकउ बारा।।
स्रोत अभिलेख 7.123 · पुस्तक पृ. 1038, 1039
भावार्थ
मूल पाठ के बादजो आपने मुझसे शुकदेवजी, सनकादि और शिवजीके मनको प्रिय लगनेवाली अति पवित्र रामकथा पूछी। संसारमें घड़ीभरका अथवा पलभरका एक बारका भी सत्संग दुर्लभ है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1038 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 पूछिहुँ राम कथा अति पावनि। सुक सनकादि संभु मन भावनि।।
English explanation
You asked about Rama's deeply purifying story, which delights the hearts of Shukadeva, Sanaka and the other sages, and Shiva.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पूछिहुँ | आपने पूछी | you asked about |
| राम | भगवान राम की | of Lord Rama |
| कथा | कथा | story |
| अति | अत्यंत | deeply |
| पावनि | पवित्र करने वाली | purifying |
| सुक | ऋषि शुकदेव | the sage Shukadeva |
| सनकादि | सनक आदि ऋषि | Sanaka and the other sages |
| संभु | भगवान शिव | Lord Shiva |
| मन | मन को | to the hearts |
| भावनि | प्रिय लगने वाली | delightful |
2 सत संगति दुर्लभ संसारा। निमिष दंड भरि एकउ बारा।।
English explanation
The company of saints is rare in this world, even once, for a moment or a single danda of time.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सत | संतों की | of saints |
| संगति | संगति | company |
| दुर्लभ | कठिनाई से मिलने वाली | rare to obtain |
| संसारा | संसार में | in the world |
| निमिष | पलक झपकने जितना क्षण | a moment, the time of a blink |
| दंड | दंड नामक समय-मात्रा | a danda, a unit of time |
| भरि | भर के लिए | for the duration of |
| एकउ | एक भी | even one |
| बारा | बार | occasion |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.123
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1038
- सहायक विषय
- रामायण-माहात्म्य, तुलसी-विनय और फलस्तुति
- मुद्रित पृष्ठ
- 1038, 1039
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।