उत्तरकाण्ड · श्लोक · श्लोक
मसकहि करइ बिंरंचि प्रभु अजहि मसक ते हीन।
मूल पाठ
मसकहि करइ बिंरंचि प्रभु अजहि मसक ते हीन।
अस बिचारि तजि संसय रामहि भजहिं प्रबीन।।122(ख)।।
स्रोत अभिलेख 7.122 · पुस्तक पृ. 1036, 1038
भावार्थ
मूल पाठ के बादप्रभु मच्छरको ब्रह्मा कर सकते हैं और ब्रह्माको मच्छरसे भी तुच्छ बना सकते हैं। ऐसा विचारकर चतुर पुरुष सब सन्देह त्यागकर श्रीरामजीको ही भजते हैं॥ १२२ (ख)॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1037 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 मसकहि करइ बिंरंचि प्रभु अजहि मसक ते हीन।
English explanation
The Lord can make a mosquito into Brahma and reduce Brahma to something lower than a mosquito.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मसकहि | मच्छर को | a mosquito |
| करइ | बना देते हैं | make into |
| बिंरंचि | सृष्टिकर्ता ब्रह्मा | Brahma, the creator |
| प्रभु | प्रभु राम | the Lord Rama |
| अजहि | ब्रह्मा को | Brahma |
| मसक | मच्छर | a mosquito |
| ते | से | than |
| हीन | हीन | lower |
2 अस बिचारि तजि संसय रामहि भजहिं प्रबीन।।122(ख)।।
English explanation
Reflecting on this, the wise abandon doubt and worship Rama.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसा | thus |
| बिचारि | विचार करके | having reflected |
| तजि | छोड़कर | abandoning |
| संसय | संशय | doubt |
| रामहि | राम को | Rama |
| भजहिं | भजते हैं | worship |
| प्रबीन | बुद्धिमान लोग | the wise |
| ख | पद-संदर्भ का चिह्न (ख) | verse reference marker (ख) |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- श्लोक
- स्रोत अभिलेख
- 7.122
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1037
- सहायक विषय
- भजन-महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 1036, 1038
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।